एक तरफ भारत दुनिया की नजर में बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में ऊभर रहा है, पर यूएन की एक रिपोर्ट ने अलग ही बात सामने रख दी है। यूएन ने भारती की जीडीपी दर के घटने का अनुमान जताया है जिसके बाद भारत की चिंता बढ़ गई है। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की विकास दर घटी है और कहा कि ये धीमी गति से आगे बढ़ रही है। बताया जा है कि भारतीय बैंकों के खराब प्रदर्शन और नोटबंदी को इसके कारण हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के बैंकों की बैलेंस शीट पर कर्जों के चलते दबाव बना हुआ है। हालांकि, यूएन ने भारत के लिए अच्छी खबर भी दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक भारत 2018 तक 8 जीडीपी के स्तर को छू लेगा। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो भारत 0.3 फीसदी की बढ़त से 7.9 के स्तर को छू लेगा।
बता दें कि यूएन ने भारत की विकास दर का स्तर 7.3 कर दिया है, जबकि अर्थशास्त्रियों ने माना था कि भारत 2017 में 7.7 तक पहुंच जाएगा। बैंकों के खराब प्रदर्शन का सीधा असर निवेश पर पड़ेगा। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भले ही नोटबंदी के दिक्कते आईं हो, लेकिन मुद्रा नीति में पकड़ और घरेलू सुधार भारत के आर्थिक हालातों को मजबूत बनाते हैं। लेकिन आर्थिक विकास को पटरी पर बनाए रखने के लिए सरकार को बैंकिंग और कॉर्पोरेट क्षेत्र की बैलेंस शीट सुधारनी होगी।