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Budget 2022: न मध्यम वर्ग, न किसान, न युवा...तो आखिर इस बजट का ग्लैमर प्वाइंट है क्या?

सार

केंद्र सरकार ने किसानों के लिए दो भरोसा दिए हैं। पहला, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड खरीद की जाएगी। इसके लिए सरकार ने 2.37 लाख करोड़ के बजट की व्यवस्था की है। दूसरा, आर्गेनिक खेती और खासकर इसे गंगा नदी के किनारे बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि मंत्रालय के दायरे को भी बढ़ाने की घोषणा की है...
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बजट 2022 - फोटो : Agency
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना संक्रमण काल का दूसरा बजट पेश किया है, लेकिन इस बजट की खासियत क्या है या ग्लैमर प्वाइंट कौन सा है, इसकी तलाश की जा रही है। बजट में मध्यम वर्ग के लिए कोई राहत नहीं है। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। मंहगाई पर काबू पाने, रोजगार बढ़ाने के कोई खास उपाय नहीं दिखाई दे रहे हैं। हां, सरकार ने कुछ नई चुनौतियों पर जरूर ध्यान दिया है। वित्त मंत्री ने अगले वित्त वर्ष में डिजिटल करेंसी लाने, आयकर दाखिल करने में हुई गड़बड़ियों में सुधार के लिए एक के बजाय दो साल का समय देने की घोषणा की है। छापे के दौरान जब्त संपत्ति में भी सरकार ने कोई सेटलमेंट न किए जाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों के लिए दो लाख करोड़ और हर साल 25 हजार किमी हाई-वे निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

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केंद्र सरकार ने किसानों के लिए दो भरोसा दिए हैं। पहला, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड खरीद की जाएगी। इसके लिए सरकार ने 2.37 लाख करोड़ के बजट की व्यवस्था की है। दूसरा, आर्गेनिक खेती और खासकर इसे गंगा नदी के किनारे बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि मंत्रालय के दायरे को भी बढ़ाने की घोषणा की है। कृषि में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। लेकिन किसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की दिशा में बजट में कुछ संतोषजनक नहीं है। मनरेगा के बजट को भी सरकार ने कम किया है। किसानों को क्या मिला है, इसे लेकर किसान नेता राकेश टिकैत कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। सरकार द्वारा धान, गेहूं के एमएसपी पर खरीद के डिजिटल भुगतान को झुनझुना बता रहे हैं। राकेश टिकैत कहते हैं कि सरकार को 23 एमएसपी वाली फसलों को ही डिजिटल सिस्टम से जोड़ देना चाहिए था।

डिजिटल पढ़ाई में संसाधन बढ़ाएगी सरकार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में कोरोना काल के दौरान स्कूली शिक्षा को लेकर पैदा हुई चुनौतियां का असर साफ दिखाई पड़ रहा है। वित्त मंत्री ने डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना, ई-विद्या के विस्तार की घोषणा की है। शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई, 200 चैनल के माध्यम से शिक्षा को धार देने की घोषणा की है। आईटीआई में ड्रोन स्किल की शिक्षा देने, डिजिटल एजुकेशन को बढ़ाने पर जोर दिया है।

रोजगार कैसे बढ़ेगा, मंहगाई कैसे कम होगी?

बजट में वित्त मंत्री की घोषणा से साफ है कि सरकार पर खर्च घटाने का भारी दबाव है। राजकोषीय घाटा भी बढ़ा है। इसमें रोजगार बढ़ाने के कोई खास उपाय नहीं दिखाई दे रहे हैं। 25000 किमी राजमार्ग निर्माण, एमएसएमई को दो लाख करोड़ रुपये की सहायता से कुछ सहूलियत आ सकती है, लेकिन इससे रोजगार की दिशा में कोई तेजी आने की संभावना कम है। केंद्र सरकार ने रेलवे में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लक्ष्य को मंत्र के तौर पर अपना लिया है। 400 वंदे भारत ट्रेन चलाने की घोषणा हुई है। यह सब उपाय देश पर पड़ रहे बेरोजगारी के दबाव को कम करने में नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। सरकार खर्च के दबाव को महसूस कर रही है। वित्त मंत्री ने भी कहा कि अगले साल तक इसे कम किया जाएगा। उससे साफ है कि वित्त वर्ष 2022-23 में भी मंहगाई की रफ्तार पर कोई ब्रेक नहीं लगने वाला है। हालांकि सरकार ने सामाजिक-आर्थिक बजट के क्रम में नए वित्त वर्ष में 5.5 लाख करोड़ घरों में जल से नल और 48 हजार करोड़ की लागत से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 80 लाख लाख घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा है। कुल मिलाकर बजट में आय बढ़ने के साधनों का आभाव दिखाई पड़ रहा है।

मध्यम वर्ग को क्या मिला?

पिछले कई साल से मध्यम वर्ग के हाथ लगातार खाली हैं। सामान्य बाजार में रौनक गायब है। औद्योगिक क्षेत्र में कोरोना काल में हुई बड़े पैमाने पर छंटनी, नए रोजगार के अवसरों में कमी तथा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा भर्ती प्रक्रिया में शिथिलता बरतने से दबाव महसूस कर रहा है। मध्यम वर्ग के आयकरदाताओं के खाते में भी कुछ नहीं आया। टैक्स में छूट, टैक्स अदायगी की सीमा में 80सी के तहत छूट जैसे प्रावधानों में केंद्र सरकार ने किसी बदलाव की कोई घोषणा नहीं की। वित्त मंत्री ने माना कि आयकरदाताओं ने अच्छा योगदान दिया। केंद्र सरकार के खजाने में जीएसटी से 1.40 करोड़ रुपये की रिकार्ड वसूली हुई, लेकिन मध्यम वर्ग के हाथ पूरी तरह से खाली हैं।

पहले शेयर बाजार ने भरी उछाल और अंत में गिरावट की ओर

जब वित्त मंत्री बजट भाषण पढ़ रही थीं तो शेयर बाजार कुलांचे मार रहा था। शेयर बाजार में उछाल आ रहा था, लेकिन बजट भाषण समाप्त होते-होते तेज गिरावट देखने को मिली। आर्थिक मामले के जानकार एसके मित्तल कहते हैं कि बजट में क्या है, यह तो पूरा बजट पढ़ने के बाद पता चल पाएगा। अभी तक जो समझ में आ रहा है, उससे लग रहा है कि सरकार ने केवल यथा स्थिति को बनाए रखा है। कारपोरेट जगत से लेकर आम आदमी तक के लिए कुछ भी खुश होने जैसा नहीं है।

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