दूसरी ओर भारतीय चिकित्सा उपकरण उद्योग संगठन के समन्वयक राजीव नाथ ने भी निराशा जताई और कहा कि अगर किसी उपकरण पर पांच प्रतिशत आयात शुल्क है, तो उस पर पांच प्रतिशत सेस लगने से शुल्क 5.25 प्रतिशत हो जाएगा। भारतीय घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देने के लिए यह 0.25 प्रतिशत वृद्धि बहुत मामूली है।
सालाना 38,837 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरण आयात पर खर्च हो रहे हैं, 80 से 90 प्रतिशत उपकरण आयातित हैं, ऐसे में उम्मीदें कहीं अधिक थीं।