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आम बजट 2020: अमेरिका-जर्मनी की तर्ज पर सरकार बदल रही आयकर ढांचा

Mon, 03 Feb 2020 04:46 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बजट 2020 - फोटो : पीटीआई
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केंद्र सरकार ने बजट 2020-21 के जरिये पहली बार न सिर्फ आयकर के दो ढांचे का विकल्प पेश किया है, बल्कि भविष्य में इसमें व्यापक बदलाव के भी संकेत दिए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स स्लैब में बदलाव करते हुए आयकर दरों में कटौती के साथ 70 फीसदी रियायतें भी खत्म कर दी हैं।

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यानी सरकार की मंशा सीधी कमाई पर सीधा कर जैसी व्यवस्था लागू करने की है, जैसा अमेरिका और जर्मनी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में हो रहा है। दरअसल, अमेरिका में किसी वेतनभोगी या पेशेवर को आयकर बचाने के लिए किसी तरह के निवेश पर छूट नहीं दी जाती है।

वहां आयकर की संघीय व्यवस्था के साथ राज्यों की भी अपनी हिस्सेदारी होती है। हर नियोक्ता के लिए कर्मचारी की आय पर निश्चित कर काटना अनिवार्य होता है। मोदी सरकार देश में इस व्यवस्था को केंद्रीय ही रखना चाहती है, लेकिन निवेश के जरिये मिलने वाली छूट खत्म कर ऐसे करदाताओं की कमाई पर सीधे तौर पर टैक्स वसूलने की व्यवस्था बना रही है।
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उदाहरण के तौर पर अमेरिका में किसी करदाता को अपनी 10 हजार डॉलर की सालाना आय पर, 1 डॉलर से 8,350 डॉलर तक 10 फीसदी यानी 835 डॉलर टैक्स देना होगा।

इसके बाद कमाए गए प्रत्येक डॉलर पर 15 फीसदी आयकर लगता है। यानी 8,351 से 10 हजार डॉलर तक कुल 247.50 डॉलर टैक्स बनेगा। इस प्रकार 10 हजार की आय पर कुल कर देनदारी 1,082.50 डॉलर बनती है। इसके अलावा निर्धारित सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा योगदान के मद में भी कुछ कटौती होती है।

खास बात यह है कि अमेरिकी करदाता अपनी कटौती को बचाने के लिए किसी तरह की निवेश सुविधा का लाभ नहीं उठा सकता है। सिर्फ निश्चित सेवानिवृत्ति योजनाओं पर ही रिफंड की सुविधा मिलती है। 

जर्मनी में भी समान नियम

यूरोपीय देश जर्मनी में भी आयकर की संघीय और प्रांतीय व्यवस्था है, लेकिन कर निर्धारण करते समय नागरिकों की क्षमता, करारोपण में समानता और कानून सम्मत होने का ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा कृषि और फॉरेस्ट्री से प्राप्त आय, व्यवसाय से आय, पेशेवर की आय, नौकरीपेशा की आय, पूंजीगत लाभ, संपत्ति लाभ या अन्य स्रोत से होने वाली आय पर अलग-अलग श्रेणियों में गणना की जाती है।

लेकिन यहां भी नागरिकों को कर बचाने के लिए निवेश के कोई विकल्प नहीं दिए जाते। यानी, जर्मनी में कमाई करने वाले को सीधे तौर पर निश्चित मात्रा में टैक्स अदा करना होता है। 
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लेकिन भारत के लिए चुनौतियां अलग

अमेरिका की तर्ज पर अगर भारत सरकार नई कर व्यवस्था को पूरी तरह लागू करती है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक सुरक्षा की आएगी। अमेरिका में नागरिकों से सीधे तौर पर कर वसूलने के साथ सरकार उन्हें कई तरह की सामाजिक सुरक्षा भी मुहैया कराती है। इसमें छह योजनाएं प्रमुख तौर पर आती हैं।

जरूरतमंद परिवारों की सहायता, जिसके तक मार्च, 2019 तक तीन सदस्यों वाले परिवार (करीब 20 लाख नागरिक) को 486 डॉलर प्रतिमाह दिए गए। मेडिकेड योजना के तहत 7.1 करोड़ नागरिकों को चिकित्सा सुविधा दी गई। पोषण पूरक योजना में 3.4 करोड़ नागरिकों को प्रतिमाह 129.97 डॉलर की मदद मिली।

आर्थिक मदद योजना के तहत 80 लाख नागरिकों को प्रतिमाह 567.39 डॉलर दिए गए। इसी तरह, इनकम टैक्स क्रेडिट के रूप में सालाना 55,884 डॉलर से कम कमाने वाले 2.2 नागरिकों को 3,191 डॉलर सालाना की मदद दी गई। हाउसिंग असिस्सेंट योजना के तहत 22 लाख परिवारों को आवास सुविधा मुहैया कराई गई। हालांकि, मोदी सरकार भी आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, न्यूनतम आय गारंटी योजना के जरिये इस दिशा में काम कर रही है, लेकिन अभी रास्ता काफी लंबा है। 
 
सबसे ऊंची आयकर दर वाले देश
डेनमार्क     0-63 फीसदी
फ्रांस         0-50 फीसदी (21 फीसदी सोशल चार्ज)
चीन          5-45 फीसदी
ऑस्ट्रेलिया  0-45 फीसदी
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