अगले साल 1 अप्रैल से होम और ऑटो लोन पर लगने वाले ब्याज की व्यवस्था बदल जाएगी। अभी बैंक खुद ही तय करते हैं कि ब्याज दर कब बढ़ानी-घटानी है। लेकिन, अप्रैल से वे आरबीआई द्वारा रेपो रेट घटाने के तुरंत बाद ब्याज दर घटाने को बाध्य होंगे।
यही व्यवस्था छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले कर्ज पर भी लागू होगी। अभी बैंक एमसीएलआर यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट के आधार पर कर्ज देते हैं। अब इसकी जगह नया मानक होगा, जिसे बैंक खुद नहीं तय कर सकेंगे। ये मानक या तो रेपो रेट के हिसाब से तय होगा या सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न के आधार पर।
इस बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश इस महीने के अंत तक जारी होंगे।यह घोषणा रिजर्व बैंक ने बुधवार को की। आरबीआई का कहना है कि इससे लोन देने की व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। ये व्यवस्था फ्लोटिंग रेट पर लिए गए सभी तरह के कर्ज पर लागू होगी।
मानक तय करने के चार विकल्प होंगे
बैंकों के पास पहला विकल्प रिजर्व बैंक द्वारा घोषित रेपो रेट के आधार पर दर तय करने का होगा। दूसरा और तीसरा विकल्प 91 दिनों या 182 दिनों की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न जितनी ही दर का होगा। चौथा विकल्प ये होगा कि बैंक तीन संस्थाओं से मिलकर बने एफबीआईएल द्वारा तय मानक पर दर तय करें। वैसे सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न भी एफबीआईएल ही तय करेगी।