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आज का साक्षात्कार : शत प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए और वक्त दे सरकार

Mon, 15 Jul 2019 01:42 AM IST
Avdhesh Kumar राजन वढेरा, अध्यक्ष, सियाम
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electric vehicles - फोटो : Social
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सुस्ती के दौर से गुजर रहे मोटर वाहन उद्योग की बिक्री लगातार घट रही है। वाहनों की इंवेंट्री का अंबार लगने से कंपनियां उत्पादन में कटौती कर रही हैं। ऊपर से एक अप्रैल, 2020 से देशभर में सिर्फ बीएस-6 मानक के वाहन ही बिकेंगे, जिसके लिए कंपनियां 70 से 80 हजार करोड़ खर्च कर चुकी हैं। अब सरकार ने कहा है कि 2030 से सिर्फ ई-वाहन ही बिकेंगे, जिससे यह उद्योग सकते में है। इन्हीं मसलों पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अध्यक्ष राजन वढेरा से बातचीत की। पेश है अंश :
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मोदी सरकार का दूसरा बजट मोटर वाहन उद्योग के लिए कैसा है?

मोटर वाहन उद्योग के लिए यह बजट उत्साहवर्द्घक है। इसमें ई-वाहनों के लिए जीएसटी की दर वर्तमान के 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी करने की बात कही गई है। ई-वाहनों के कुछ कलपुर्जों पर आयात शुल्क में भी छूट मिली है। अच्छी बात यह है कि ई-वाहनों की खरीद के लिए ऋण पर आप जो ब्याज चुकाएंगे, उस पर आयकर में भी छूट का प्रावधान है। उद्योग संगठन के रूप में सियाम ने बजट से पहले यही सुझाव दिया था।

हम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने हमारे सुझाव पर गौर किया और उसे बजट में शामिल किया। साथ ही यह भी कहना चाहेंगे कि इस समय मोटर वाहन उद्योग बुरे दौर से गुजर रहा है। इस बजट से उद्योग को कुछ स्टिमुलस पैकेज की आस थी, लेकिन इस मोर्चे पर निराश मिली।
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बजट में ई-वाहनों को कई प्रकार की छूट दी गई है, लेकिन परंपरागत आईसी इंजन वाले वाहनों के संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया?

इससे वाहन उद्योग को एक तरह से धक्का लगा है। ई-वाहनों पर जो भी रियायतें दी गई हैं, उसका हम विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन परंपरागत आईसी (इंटरनल कंबशन) इंजन वाले वाहनों को अभी सरकार के समर्थन की दरकार है। बीते 100 साल में यह तकनीक विकसित हुई है। इसकी मांग में इजाफा हो, इसके लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। सुस्ती के दौर से गुजर रहे वाहन उद्योग को करों में राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सरकार ने ई-वाहनों के परिचालन के लिए एक समय निर्धारित कर दिया है। यह कितना तर्कसंगत है?

इस बारे में हमें आधिकारिक रूप से कुछ नहीं बताया गया है। हालांकि, सरकार पहले ही घोषित कर चुकी है कि 2030 से सिर्फ ई-वाहन ही बिकेंगे। यह हमारे टाइमलाइन से बिल्कुल अलग है। सरकार ने ई-वाहनों को लेकर जो टाइमलाइन तय किया है, उसमें काफी दिखाई गई है। देखिए... हमने अभी-अभी उत्सर्जन मानक बीएस-4 से बीएस-6 करने के लिए 70-80 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है।

अभी बीए-6 मानक वाले वाहन बिकने भी शुरू नहीं हुए कि सरकार ने ई-वाहनों को लेकर टाइमलाइन घोषित कर दिया। अगले पांच साल में ई-वाहनों पर जाने के लिए फिर हजारों करोड़ रुपये निवेश करने होंगे। नई तकनीक के लिए इतना पैसा कहां से आएगा। एकतरफा फैसले से पहले सरकार को हमारा भी पक्ष सुनना चाहिए था।

आपके हिसाब से ई-वाहनों के लिए टाइमलाइन क्या होना चाहिए?

हमारी मानिए तो यह टाइमलाइन 2030 के बदले 2047 होना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो वाहन उद्योग ने बीएस-6 तकनीक पर जो निवेश किया है, उसका प्रतिफल मिल जाएगा। उसके बाद हम एक बार फिर से ई-वाहन तकनीक में हजारों करोड़ रुपये का निवेश करने में सक्षम हो जाएंगे। यह योजना ज्यादा फीजिबल है। साथ ही ई-वाहन की तकनीक अभी काफी महंगी है। इसके लिए जरूरी बैटरी का आयात करना होगा। इसका मतलब है कि इसके आयात पर हमारी विदेशी मुद्रा बाहर जाएगी। इसलिए हमें ज्यादा समय मिलना चाहिए।
 
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आप क्या आईसी इंजन वाले वाहनों पर भी जीएसटी में कटौती चाहते हैं?

बिल्कुल चाहते हैं... हम इसके लिए सरकार के पास फिर जाएंगे। वाहन उद्योग को संकट से निकालने के लिए सरकार का सहयोग जरूरी है। इसलिए हम चाहते हैं कि आईसी इंजन वाले वाहनों पर भी कर में छूट मिले। इसके अलावा वाहन उद्योग चाहता है कि एक अप्रैल, 2020 से बीएस-6 वाहनों की बिक्री शुरू होने से पहले एक फरवरी से देशभर में बीएस-6 मानक के ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की भी बिक्री शुरू हो। तभी हम देशभर में इस मानक के वाहन पहुंचा सकेंगे।

डीलरों के एसोसिएशन फाडा का कहना है कि सुस्ती से 300 डीलरशिप बंद हो चुकी है। इससे बेरोजगारी नहीं बढ़ेगी?

फाडा ने कहा है तो खबर ठीक ही होगी। 300 डीलरशिप बंद होने का मतलब है कि प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से 30,000 लोगों का रोजगार प्रभावित होना। अभी देखिए... वाहनों के नहीं बिकने से हममें से कुछ ने पिछले महीने भी फैक्ट्री में शटडाउन लिया था। इस महीने भी उत्पादन कम किया जाएगा। इसका भी असर रोजगार पर पड़ेगा। जब हम उत्पादन कम करेंगे तो हमारे वेंडरों के प्रोडक्शन प्रोग्राम पर भी असर पड़ेगा।
 
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