वित्त वर्ष 2017-18 के बजट पेश होने में चंद दिन शेष हैं। जैसे-जैसे बजट पेश किए जाने का दिन निकट आ रहा है, उसको लेकर व्यापक रूप से उत्कंठा व हलचल भी तेज होती जा रही है। विमुद्रीकरण सरकार का अत्यंत गंभीर कदम था, जिसने भारत को तीव्र बदलाव की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है।
आगामी केंद्रीय बजट को ऐसे अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उपयोग सरकार को देश को तेज बदलाव के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए अवश्य करना चाहिए। इसके अतिरिक्त सबसे अहम बात यह है कि इस बजट में कई महत्वपूर्ण कदम पहली बार उठाए जाने वाले हैं।
यह बजट संसद में पेश किए जाने की अपने परंपरागत समय से लगभग माह भर पहले ही घोषित किया जाएगा। इस बजट में रेल बजट को भी शामिल कर दिया जाएगा। इसमें सरकार योजनागत और गैर-योजनागत व्यय के बीच विभाजन समाप्त करेगी और स्वयं को मात्र पूंजी और राजस्व व्यय तक ही सीमित कर लेगी। इसके साथ ही इसमें विभिन्न परिव्ययों के अनुमानों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
फिक्की ने अपने सदस्यों के बीच आम बजट को लेकर कई दौर के विचार विमर्श आयोजित किए। चैंबर ने इस बारे में सरकार के समक्ष अपना विस्तृत मांग पत्र प्रस्तुत किया है, लेकिन मोटे तौर पर सात क्षेत्रों में हम सरकार द्वारा बजट में कदम उठाए जाने को लेकर विशेष रूप से आशान्वित हैं।
सार्वजनिक निवेश पर हो जोर
पिछले दो बजटों की तरह इस बजट में भी सार्वजनिक निवेश पर खास ध्यान देना जारी रखना चाहिए। पूंजी व्यय बढ़ाना चाहिए और अर्थव्यवस्था में उत्पादक एवं लाभकारी परिसपंत्तियों के निर्माण पर विशेष ध्यान केंद्रित किए जाने की जरूरत है।
व्यापक रूप से निजी निवेश को बढ़ावा देने के साथ ही इसका नेतृत्व स्वयं सरकार को बड़ी ढांचागत परियोजनाओं में अपने निवेश कार्यक्रम के जरिए करना चाहिए। ऐसी परियोजनाओं में ग्रामीण क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
जैसे ही अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधारभूत क्षेत्रों में सुधार शुरू होगा, हमें संबंधित उद्योग क्षेत्रों में मांग में भी सुधार दिखेगा।
मांग बढ़ाने के लिए उठाए जाएं कदम
उपभोग संबंधी मांग को मजबूती से प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है, क्योंकि हाल की अवधि में यही अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक शक्ति रही है। विमुद्रीकरण के चलते तरलता यानी नकदी में अस्थायी संकुचन या कमी पैदा होने से मांग में कमी स्पष्ट रूप से दिख रही है। वित्त मंत्री को कर की श्रेणियों अथवा दरों में परिवर्तन कर लोगों के हाथों में अधिक से अधिक धन छोड़ने का उपाय करना चाहिए, ताकि उपभोग मांग में अपेक्षित वृद्धि संभव हो सके।
सब पर लागू हो कारपोरेट टैक्स की दर में कटौती
इस मौके पर कॉरपोरेट टैक्स की दर में कमी व्यावसायिक आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करेगी। इससे बहुत सी कंपनियां अपने विस्तार कार्यक्रमों के लिए प्रेरित होंगी, जिसके साथ मांग भी बढे़गी।
पिछले वर्ष के आरंभ से सरकार ने कारपोरेट टैक्स की दरों में कमी शुरू की है। हालांकि यह कमी कुछ ही कंपनियों के लिए सीमित थी। इस प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए और कारपोरेट टैक्स की कम की गई दरें सभी कंपनियों के लिए लागू की जाएं।
अनौपचारिक क्षेत्र को मिले प्रोत्साहन
अर्थव्यवस्था को नियम-कानून के दायरे में लाने की पहल गति पकड़ रही है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनियमित (अनौपचारिक) क्षेत्र के उद्यमों को पर्याप्त प्रोत्साहन दिए जाएं, जिससे वे नियमित (औपचारिक) क्षेत्र के उपक्रम बन सकें।
इसके तहत असंगठित क्षेत्र की लघु इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इन प्रोत्साहनों में पूंजीकरण में आसानी, कम से कम नियमन एवं प्रक्रियागत कानून, कम टैक्स दर, सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा लाभों के साथ आसान निकासी नीति, कौशल विकास अवसर उपलब्ध कराना, कम ब्याज दर पर कर्ज की उपलब्धता और सरकारी खरीद में वरीयता जैसे कदम शामिल किए जा सकते हैं।
डिजिटल भुगतान पर हो खास फोकस
अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतानों पर मुख्यमंत्रियों का समूह पहले ही प्रधानमंत्री को बहुत सी सिफारिशें सौंप चुका है। फिक्की ने भी ऐसे भुगतानों को बढ़ावा देने के लिए कई सुझाव दिए हैं। हमारे बहुत से सदस्यों ने प्राप्तियों और भुगतानों को पूर्णरूपेण नकदीरहित बनाने की योजनाएं पेश की हैं।
हमें डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहन देनेे की जरूरत है। इसके लिए जागरूकता अभियान भी संचालित किए जाने की जरूरत है, ताकि आम लोगों को इसके लाभों से परिचित कराया जा सके और ऐसे माध्यमों के जरिए भुगतान करने पर सुरक्षा संबंधी संदेहों का भी निवारण किया जा सके।
इसको बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया जाना चाहिए और डिजिटल लेन-देन संबंधी सुविधाओं को विशेष बढ़ावा देने की जरूरत है। आगामी बजट में वित्त मंत्री को इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
जोरदार तरीके से चले विनिवेश कार्यक्रम
बैंकिंग क्षेत्र में हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत करने के लिए उनमें भारी पूंजी निवेश की उम्मीद करते हैं। इसी के साथ ही अपेक्षाकृत अधिक जोरदार तरीके से विनिवेश कार्यक्रम को भी संचालित करने की जरूरत है।
हाल ही में साधारण बीमा कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी का विनिवेश करने संबंधी फैसला सकारात्मक कदम है और आगामी वित्त वर्ष के दौरान हम ऐसे ही और कदम उठाए जाने की उम्मीद करते हैं।
जारी रहे प्रशासनिक कार्रवाइयों के कदम
हाल के दिनों में हमने कानूनी बदलावों और प्रशासनिक कार्रवाइयों के जरिए अनेक सकारात्मक उपायों को देखा है, जिनके माध्यम से अनिश्चितताएं कम हुई हैं और लंबे समय से अनिर्णीत कुछ अहम टैक्स संबंधी मुद्दों का समाधान हुआ है। करदाताओं की सहभागिता बढी़ है।
दोनों ही तरफ धीरे-धीरे दृष्टिकोण और धारणा में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। हमें उम्मीद है कि इस प्रक्रिया को आगे भी जारी रखा जाएगा।
ये कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनमें हम वित्त मंत्री से बजट भाषण के दौरान कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन इनके अलावा संभवत: इनसे भी कहीं अधिक एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिस पर सरकार द्वारा दिशानिर्देश दिए जाने की उम्मीद करते हैं।
यह मुद्दा चुनावी फंडिंग से जुड़ा है, जो लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस बारे में स्वयं प्रधानमंत्री ने सुधारों को आरंभ किए जाने के लिए सभी राजनीतिक दलों को साथ आने का आह्वान किया है।
फिक्की उम्मीद करता है कि आम बजट इस मामले पर अवश्य ध्यान देगा और सरकार की सुधारों के प्रति गंभीरता और उपायों को और मजबूती प्रदान करेगा।