पारेख ने साथ ही यह सुझाव भी दिया कि जैसे दुनिया भर में हो रहा है भारत में भी केंद्रीय बैंकों को निजी क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं के बॉन्ड खरीदने चाहिए। क्योंकि आप ने खुद यह स्टैंड लिया है कि आप बैंकों को फंड देंगे और बैंक उन सभी उपकरणों को खरीदेंगे जिनमें माइक्रोफाइनेंस या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां शामिल हैं।
इस पर शक्तिकांत दास ने कहा, भारत का कानून इसकी अनुमति नहीं देता। लेकिन फिर भी हम पूरी तरह सजग हैं और मैं आश्वासन देता हूं कि जब कभी भी जरूरत होगी हमारी ओर से हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। जैसे म्यूचुअल फंड सेक्टर में हमने किया।
मित्तल बोले, बढ़ना चाहिए मोरटोरियम
वहीं भारती इंटरप्राइजेज के उपाध्यक्ष और सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने कहा, कॉरपोरेट और अर्थव्यवस्था पर तनाव को कम करने के लिए मोरेटोरियम बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि एनपीए की सूची में शामिल होने वाली कंपनियों की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में मोरेटोरियम को बढ़ाने का फैसला गंभीर चिंतन और विचार विमर्श के साथ किया जाए।
अगले साल 12.15 फीसदी तक जा सकता है एनपीए
आरबीआई ने अपनी छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में खुद कहा है कि मोरेटोरियम का असर बैंकों पर पड़ेगा। कोरोना काल में डगमगाई वित्तीय गतिविधियों के चलते बैंकों का कुल एनपीए इस साल मार्च के 8.5 फीसदी से बढ़कर अगले साल मार्च में 12.5 फीसदी तक पहुंच सकता है।