विश्व बैंक का कहना है कि कोविड-19 संकट के बाद भारत सुधारों के जरिए 7 फीसदी का विकास दर हासिल कर सकता है। इसके लिए उसे स्वास्थ्य, श्रम, भूमि, कौशल और वित्तीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करना होगा।
इन सुधारों का उद्देश्य घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पादकता, निजी निवेश और निर्यात बढ़ाने वाला होना चाहिए। कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार आरबीआई के साथ मिलकर काम कर रही है।
भारत में विश्व बैंक के कंट्री प्रमुख जुनैद अहमद ने बुधवार को कहा, कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार को लेकर अनिश्चितता और अवसर दोनों दिखाई दे रहे हैं। वैसे देश अनिश्चितताओं से निपटने में अधिक सक्षम हैं, जो बुनियादी ढांचा, श्रम एवं भूमि जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं और सुनिश्चित करते हैं कि उनकी राष्ट्रीय प्रणाली वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जुड़ी हो।
ये देश किसी भी वैश्विक बदलाव का बेहतर लाभ उठा सकते हैं। इसलिए भारत को इन क्षेत्रों में निवेश पर जोर देना चाहिए। इससे महामारी के प्रभाव से निपटने और प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, भारत को सब्सिडी, कर्ज, गैर-कर राजस्व वसूली बढ़ाने, नए कर्ज के पुनर्भुगतान, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और फिनटेक की ओर ध्यान देना होगा।
महामारी को अवसरों में बदले भारत : शॉ
बायोकॉन लिमिटेड की चेयरपर्सन एवं एमडी किरण मजूमदार शॉ का कहना है कि भारत इस महामारी को अवसरों में बदलने पर जोर दे। साथ ही अपने टैलेंट पूल को मजबूत बनाते हुए एक सेवा प्रदाता बनने की जगह वैश्विक नवोन्मेष मूल्य शृंखला का हिस्सा बनने की ओर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, भारत के पास सूचना प्रौद्योगिकी, एनालिटिक्स, डाटा विज्ञान, इंजीनियरिंग और मेडिकल स्नातकों का मजबूत आधार है। इनका बेहतर इस्तेमाल करते हुए नवोन्मेष को प्रोत्साहित करना होगा।
स्टार्टअप से पूरा होगा 50 खरब डॉलर अर्थव्यवस्था का सपना : राय
इंटेल इंडिया की भारतीय प्रमुख निवरुति राय का कहना है कि भारत को 2025 तक 50 खरब डॉलर (5 ट्रिलियन डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनने के लिए स्टार्टअप, कौशल और नए कारोबार मॉडल पर जोर देना चाहिए।
भारत में कौशल श्रमबल की कमी नहीं है। इसका बेहतर इस्तेमाल कर क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डाटा एनालिटिक्स, तकनीक मैन्युफैक्चरिंग के जरिए भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था आगे बढ़ सकती है।