बड़ी संख्या में अमेरिकी कंपनियां, भारतीय कंपनियों द्वारा मुहैया कराई जा रही सेवाओं की वजह से काम कर पा रही हैं। उक्त बात सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अरुणा सुंदरराजन ने मंगलवार को कही। उन्होंने कहा कि 85000 वीजा में से केवल 17 फीसदी वीजा ही भारतीय कंपनियों के पास आते हैं।
उन्होंने कहा कि जब अमेरिकी सरकार एच 1-बी वीजा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक करेगी तो भारतीय कंपनियों की तरफ से होने वाले वैल्यू एडिशन पर जरूर ध्यान रखेगी।
ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के उद्घाटन सत्र में सुंदरराजन ने कहा ये तथ्य है कि कुल 85000 वीजा में से केवल 17 फीसदी ही भारतीय कंपनियों के हाथ आते हैं। जबकि बड़ी संख्या में अमेरिकी कंपनियां, भारतीय कंपनियों द्वारा मुहैया कराई जा रही सुविधाओं के दम पर ही काम करती हैं।
भारत सरकार अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मामले में समन्वय कर रही है। हम आशा कर रहे हैं कोई बदलाव या समीक्षा की जाएगी। सुंदरराजन ने कहा कि नई प्रोद्यौगिकियों के उभरने से लोग लगातार एक से दूसरी जगह आवाजाही कर रहे हैं।
जिन कंपनियों में नामित किया गया है उनमें से कुछ ने स्पष्ट किया है कि ये साल भी पिछले साल से कुछ अलग नहीं है। वार्षिक मूल्यांकन के तहत कुछ लोगों के कॉन्ट्रैक्ट की सीमा में
बढ़ोत्तरी नहीं होगी, लेकिन ये अनुमान लगाना भी एकदम गलत होगा कि अचानक इस साल बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां जाएंगी।
सुंदरराजन ने कहा कि यह सच है कि नई प्रौद्योगिकियां उभर रही हैं डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा, डेटा क्लाउड ये सभी बढ़ रहे हैं, स्टार्ट अप बढ़ रहे हैं इसलिए कुछ लोग एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई भी रिपोर्ट इस बदलाव को आईटी सेक्टर में नौकरियों के बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान के रूप में बता रही है तो वह निश्चित रूप से भ्रामक और गलत होगी।