लगातार डिफाल्ट से मुश्किल में फंसी सबसे बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) से 90 हजार करोड़ की कर्ज वसूली पर ऋणदाता सोमवार को मंथन करेेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक की अगुवाई वाले 30 कर्जदाताओं का समूह बैठक के दौरान कर्ज की राशि को इक्विटी में बदलने पर विचार कर सकता है।
रिजर्व बैंक ने पिछले दिनों कहा था कि डीएचएफएल जैसी कंपनियों में संपत्ति देयता काफी बेमेल है, जो उनके वित्तीय मुश्किलों में फंसने का सबसे बड़ा कारण है। ये कंपनियां लंबी अवधि की पूंजी जुटाने के लिए छोटी अवधि के कर्ज उठाती हैं, जो काफी बेमेल है। इसके अलावा कई रेटिंग एजेंसियों ने भी कंपनी की रेटिंग घटा दी है, जिसका असर शेयर बाजार में कंपनी के निवेशकों पर भी होने लगा है।