देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में वर्ष 2025 तक एक ट्रिलियन डॉलर (करीब 70 लाख करोड़ रुपये) के स्तर पर पहुंचने की क्षमता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में निदेशक संगीता सक्सेना ने शुक्रवार को भारत-चीन व्यापार मंच को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस दौरान उन्होंने देश के सेवा क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 56 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ताओं और चीन के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े इंस्टैंट मैसेजिंग सेवा उपयोगकर्ताओं के साथ भारत दुनिया की तीन बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।
इन सबसे ऊपर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) है, जिसके पास आधार के रूप में 1.2 अरब लोगों का डाटा बेस मौजूद है। सक्सेना ने यापार मंच को संबोधित करने के दौरान चीनी निवेशकों को इस साल सितंबर में बंगलूरू में सेवा क्षेत्र के लिए आयोजित होने वाली ‘भारत वैश्विक प्रदर्शनी’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
सेवा क्षेत्र में काफी क्षमताएं
सक्सेना ने व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सेवा क्षेत्र में काफी क्षमताएं हैं। सरकार ने भी महसूस किया है कि भारत 2025 तक डिजिटल अर्थव्यवस्था के जरिए एक ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक मूल्य बना सकता है। वर्तमान में हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था 200-250 अरब डॉलर की है, जो 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि भारत अगर आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के साथ शिक्षा, ऊर्जा, वित्त, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक और परिवहन जैसे अन्य क्षेत्रों में भी डिजिटल अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को उजागर करता है तो इससे हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
तालमेल से बाजार में आएगी विविधता
सक्सेना के मुताबिक, सेवा क्षेत्र चीन से स्थानीय और वैश्विक निवेशकों के लिए व्यापार का अवसर देता है ताकि उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत चीन के अलावा कई देशों के साथ साझेदारी में प्रवेश कर रहा है ताकि तालमेल रखने से बाजार में विविधता आए। चीन विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी है, जबकि भारत सॉफ्टवेयर और सेवा क्षेत्र में अग्रणी है।
जीडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी अधिक
भारत 2025 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है। इसमें सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी तीन ट्रिलियन डॉलर की होगी। यह वही क्षेत्र है, जिसमें विकास की अधिकतम क्षमता है। देश की जीडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 62 फीसदी है। यह 50 फीसदी से अधिक एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) आकर्षित करता है। भारत की 40 फीसदी से अधिक सेवाओं का निर्यात आईटी और सक्षम सेवाओं से होता है।