गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। 78 बोगस फर्म बनाकर 174 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कर चोरी की है। इसमें सबसे ज्यादा चपत लोहा और स्टील कारोबार के क्षेत्र में लगा। इनके खिलाफ वाणिज्य कर विभाग को ऐसी मुखौटा फर्मों का पंजीयन रदद करने की कार्रवाई करनी पड़ी।
एक जुलाई 2017 से इस नई कर व्यवस्था को लागू किया गया था। इसके बाद से कर चोरी रुकने के दावे किए जा रहे थे। मगर, कहानी उल्टी पड़ गई। मास्टर माइंड लोगों ने आसान पंजीयन का फायदा उठाते हुए धड़ाधड़ फर्जी फर्में बनाई और कर चोरी का अंजाम दिया। जबकि वास्तव में इन फर्मों का अस्तित्व नहीं होता, सिर्फ कागजों में कारोबार चलते हैं।
इनका मकसद फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का लाभ लेना होता है। विभाग ने पिछले करीब ढाई साल में ऐसी फर्मों को राडार पर लेते हुए कार्रवाई की। कई जगह छापेमारी भी की गई। इनके द्वारा कुल 174 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई थी।