नियंत्रण रेखा के पार सेना के सर्जिकल ऑपरेशन का भारतीय शेयर बाजारों पर खास असर नहीं पड़ेगा। हालांकि बृहस्पतिवार को बाजार में बिकवाली का असर दिखा और सेंसेक्स 462.28 अंक यानी 1.64 फीसदी गिर कर 27,827.53 पर बंद हुआ और रुपये में 40 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। लेकिन वित्तीय संस्थाओं का मानना है कि इस तरह के हमले का बाजार पर ज्यादा असर नहीं होगा। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि मैक्रो-इकोनॉमिक आंकड़े मजबूत हैं। लिहाजा ऐसे हमलों का बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। कारगिल हमलों के दौरान भी शुरू में बाजार गिरा था लेकिन बाद में संभल गया था।
एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट ‘इकोरैप’ में कहा है कि हमले की वजह से शुरू में वित्तीय बाजारों का रुख नकारात्मक रहा। लेकिन हमारा मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों का बाजार पर कोई ठोस असर नहीं पड़ने जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और मैक्रो-इकोनॉमिक आंकड़े भी बेहतर हैं। इसलिए ऐसे हमलों के बाजार पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका बेहद कम है।
कारगिल हमलों के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। उस दौरान शुरुआती तीन दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमश: 286 और 79 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी लेकिन इसने जल्द ही रिकवरी कर ली थी। कारगिल युद्ध खत्म होने के समय तक सेंसेक्स 652 और निफ्टी 191 अंक की बढ़त हासिल कर चुका था। रुपये में मामूली गिरावट हुई थी। इससे यह जाहिर हुआ कि रुपये में गिरावट का ज्यादा संबंध बाहरी कारकों से है। कारगिल युद्ध के वर्ष यानी 1999-2000 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर भी 6.5 फीसदी रही थी, जो उस दौर के हिसाब से अच्छी थी।