सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन कंपनियों को लॉकडाउन के दौरान रद्द टिकटों की किराया वापसी के लिए बेहतर तंत्र बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, उपभोक्ताओं को बिना किसी मुसीबत के कम समय में इस राशि का भुगतान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक रास्ता यह भी है कि कंपनियां उपभोक्ताओं को कम से कम दो साल के लिए क्रेडिट नोट जारी करें और इसका इस्तेमाल किसी भी रूट पर किया जा सके।
जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मंत्रालय और विमानन कंपनियों से लॉकडाउन के दौरान रद्द टिकटों पर पूरा किराया वापस मांगने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा है। पीठ ने केंद्र सरकार से एक रुख अपनाने और मंत्रालय व विमानन कंपनियों से किराया वापसी के तरीकों पर चर्चा कर कोर्ट को तीन हफ्ते में अवगत कराने को कहा है। सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने कोर्ट को बताया, दुनिया में कहीं भी पूरा किराया वापस नहीं किया जा रहा। कंपनी ने कहा, हम मंत्रालय से विचार-विमर्श कर समाधान निकालेंगे।
याचिकाओं ने मांग की थी कि कंपनियाें द्वारा पूरा किराया वापस न करने को उड्डयन मंत्रालय के निर्देश का उल्लंघन करार दिया जाए। इसमें दावा किया गया कि मंत्रालय ने 16 अप्रैल को आदेश जारी किया था जिसमें स्पष्ट था कि लॉकडाउन के दौरान बुक टिकटों के रद्द होने पर पूरा किराया वापस होगा। जिन लोगों ने लॉकडाउन से पहले टिकट कराए थे उन्हें पूरा किराया न वापस किया जाए। याचिका में कहा गया कि अगर उड़ान लॉकडाउन के कारण रद्द हुई तो उपभोक्ताओं के साथ भेदभाव है। यह संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।