Microsoft-Build.ai Deal: माइक्रोसॉफ्ट का यह निवेश इनसाइट पार्टनर्स के नेतृत्व में सीरीज सी फंडिंग राउंड में Builder.ai की ओर से 100 करोड़ डॉलर जुटाने के करीब एक साल बाद आया है। 2016 में स्थापित स्टार्टअप बिल्डर.ai, एक मंच प्रदान करते हुए उद्यमियों को एआई तकनीक का लाभ उठाते हुए व्यापक कोडिंग ज्ञान के बिना अनुप्रयोगों का निर्माण करने में सक्षम बनाता है।
लंदन स्थित एआई स्टार्टअप Builder.ai ने एप्लिकेशन डेवलपमेंट व एआई-संचालित समाधानों पर सहयोग करने के लिए तकनीकी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट से निवेश हासिल किया है। हालांकि निवेश की राशि का खुलासा नहीं किया गया है। साझेदारी का उद्देश्य माइक्रोसॉफ्ट की एजूर सेवाओं और बिल्डर.ai की सॉफ्टवेयर असेंबली लाइन के बीच संबंध स्थापित करके व्यवसायों को सशक्त बनाना और बाजार में कंपनी की मौजूदगी को बढ़ाना है।
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माइक्रोसॉफ्ट टीम्स स्टोर के भीतर बिल्डर.ai के एआई उत्पाद प्रबंधक नताशा का एकीकरण माइक्रोसॉफ्ट ग्राहकों को उनके व्यवसाय मॉडल अनुप्रयोगों के लिए प्रोटोटाइप बनाने में सहायता करेगा। इसके अतिरिक्त Builder.ai व्यवसायों को Azure पर क्लाउड सेवाओं तक एकीकृत पहुंच प्रदान करेगा। इससे उनके डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में मदद मिलेगी।
एक साल पहले Builder.ai ने सीरीज सी फंडिंग में हासिल किए थे 100 मिलियन डॉलर
माइक्रोसॉफ्ट का यह निवेश इनसाइट पार्टनर्स के नेतृत्व में सीरीज सी फंडिंग राउंड में Builder.ai की ओर से 100 करोड़ डॉलर जुटाने के करीब एक साल बाद आया है। 2016 में स्थापित स्टार्टअप बिल्डर.ai, एक मंच प्रदान करते हुए उद्यमियों को एआई तकनीक का लाभ उठाते हुए व्यापक कोडिंग ज्ञान के बिना अनुप्रयोगों का निर्माण करने में सक्षम बनाता है। Builder.ai का दावा है कि उसका प्लेटफॉर्म पारंपरिक मानव टीमों की तुलना में छह गुना तेजी से और 70% तक सस्ते सॉफ्टवेयर और ऐप विकसित कर सकता है।
इस साझेदारी को Google के वर्कस्पेस के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए AI क्षमताओं का लाभ उठाने के माइक्रोसॉफ्ट की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि आईएमएआरसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एआई बाजार 2028 तक 3.9 बिलियन डॉलर को पार करने का अनुमान है। नवाचार और दक्षता को चलाने के लिए एआई प्रौद्योगिकी की क्षमता के साथ, Builder.ai जैसे स्टार्टअप डिजिटल युग में व्यवसायों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में इसका लाभ भविष्य में भारत को भी मिल सकता है।