वहीं विनिर्माण और सेवा क्षेत्र दोनों का आकलन करने वाले कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट सूचकांक फरवरी में बढ़कर 57.6 पर पहुंच गया जो उसके 54.6 के दीर्घकालिक औसत से ज्यादा है, जबकि जनवरी में यह 56.3 के स्तर पर था। लीमा ने कहा कि कारोबारी गतिविधियों में सुधार की मुख्य वजह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों से मजबूत मांग रही है। फरवरी के आंकड़ों से पता चलता है कि विनिर्माण और सेवा आउटपुट में सुधार से निजी क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियां आठ साल की ऊंचाई पर पहुंच गईं।
मार्च में भी बढ़ सकता है उत्पादन
लीमा ने कहा, ‘विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में नए काम में बढ़ोतरी से पता चलता है कि मार्च में भी निजी क्षेत्र में उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जिसका सकारात्मक असर वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में दिख सकता है।’ वहीं नई नौकरियां पैदा होने की दर सुस्त रही, जो तीन महीने में सबसे कम रही।
लेकिन नियुक्तियों पर जारी रही रोक
2019-20 की अंतिम तिमाही के बीच में कारोबार में बढ़ोतरी के बावजूद फरवरी में सेवा प्रदाताओं नई नियुक्तियों पर रोक जारी रखी। इसके अलावा खाद्य पदार्थों, श्रम, सामग्री और तेल की लागत में बढ़ोतरी की खबरों के बीच सेवा अर्थव्यवस्था के लिए इनपुट लागत में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सर्वेक्षण के मुताबिक, जनवरी से महंगाई में नरमी देखने को मिली है। प्याज और ईंधन की कीमतों में नरमी से महंगाई के मोर्चे पर राहत मिली है। हालांकि फरवरी में बिक्री मूल्य में मामूली बढ़ोतरी रही, जो जनवरी के मुकाबले कम रही।