पीठ ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनी से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीटी) की याचिका पर नोटिस जारी किया और कर्नाटक स्थित ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म गेम्सक्राफ्ट से जवाब मांगा। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को तीन सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया।
डीजीटी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को दी चुनौती
डीजीटी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 11 मई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि 'रम्मी' चाहे दांव के साथ खेला जाए या बिना दांव के, जुआ नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि रम्मी चाहे ऑनलाइन या शारीरिक रूप से खेला जाता है, काफी हद तक कौशल का खेल है, न कि मौके का खेल और इस प्रकार गेमक्राफ्ट के प्लेटफार्म पर खेले जाने वाले ऑनलाइन रमी गेम और अन्य डिजिटल गेम 'सट्टेबाजी' और 'जुआ' के रूप में कर योग्य नहीं हैं।
जीएसटी अधिकारियों ने जारी किया था नोटिस
यह मामला तब सामने आया जब गेमक्राफ्ट को पिछले साल आठ सितंबर को जीएसटी अधिकारियों की ओर से सूचना नोटिस जारी किया गया जिसमें 21 हजार करोड़ रुपये की मांग की गई। कंपनी ने इस नोटिस को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 23 सितंबर, 2022 को जीएसटी विभाग के नोटिस पर रोक लगा दी थी और कहा था कि मामले में कई विवादास्पद मुद्दे शामिल हैं।
कंपनी ने उच्च न्यायालय में क्या कहा
ऑनलाइन गेमिंग कंपनी ने फिर से उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें दावा किया गया कि इस स्थगन आदेश के बावजूद अधिकारियों ने अवैध रूप से और दुर्भावनापूर्ण रूप से उसी दिन कारण बताओ नोटिस जारी किया था जिस दिन उच्च न्यायालय का 23 सितंबर, 2022 का आदेश था। आठ सितंबर, 2022 के नोटिस में कंपनी के लेनदेन पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने की मांग की गई थी। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कंपनी ने एक बयान में कहा, 'हमने उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश पर गौर किया है। हम कुशल गेमिंग उद्योग संघों के साथ आने वाले हफ्तों में उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें रखेंगे।'
इसने कहा, हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हमें विश्वास है कि उच्चतम न्यायालय एक बार फिर पांच दशकों से अधिक समय से चले आ रहे कानून की पुष्टि करेगा और हमारी और उद्योग की स्थिति को सही साबित करेगा।