गुड्स एंड सर्विस टैक्स के लागू होने में अब एक हफ्ते से कम का समय बचा है। सरकार ने रविवार से व्यापारियों और छोटे रिटेलर्स के लिए जीएसटीएन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि इससे पहले अभी तक व्यापारियों और छोटे रिटेलर्स के बीच जीएसटी को लेकर के कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब हम आपको दे रहे हैं।
1. क्या खरीद-बिक्री की रोज करनी होगी ऑनलाइन एंट्री?
- नहीं। जीएसटी पोर्टल पर रिटर्न के जरिए मासिक तौर पर ही भेजनी होगी। कंप्यूटर पर या अपनी बही में हालांकि रोज करनी होगी एंट्री।
2. कब भरना होगा रिटर्न?
- किसी भी महीने के लिए खरीद-बिक्री के लिए रिटर्न उसके अगले महीने की 10 या 15 तारीख तक भेजनी होगी। जुलाई की रिटर्न के लिए हालांकि 25 दिनों की मोहलत मिल रही है।
3.रिटर्न भरने में हुई चूक, तो क्या होगा?
- भरे गए रिटर्न में किसी भी तरह का बदलाव करने के लिए दो महीने का वक्त मिलेगा।
4. कितनी रकम के लिए बिल जरूरी नहीं होगा?
- 200 रुपये से कम की बिक्री यदि गैर-पंजीकृत डीलर या कंज्यूमर को होगी, तो बिल बनाना जरूरी नहीं होगा। दिनभर की बिक्री के लिए एक बिल भी काटा जा सकता है।
5. क्या 200 रुपये से अधिक की हर बिक्री का बिल बनाना होगा?
- टैक्स काटे जाने की स्थिति में बिल जरूरी होगा। यदि कर मुक्त सामानों की बिक्री हुई है, तो टैक्स इनवॉयस की जगह ‘बिल ऑफ सप्लाई’ बनाना होगा।
6. अगर अभी पास में बगैर बिल वाला स्टॉक है, तो उसका क्या करना होगा?
- जीएसटी की तय दर लगाकर उसे बेचा जा सकता है, पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाएगा।
7. बिल जारी करने की कोई अंतिम समय सीमा है क्या?
- वस्तुओं की आपूर्ति मेें डिलीवरी से पहले बिल जारी करना होगा। सेवाओं के मामले में डिलीवरी के 30 दिनों के भीतर बिल भेजे जा सकते हैं।
8. क्या हर कारोबारी को अकाउंटेंट और सीए रखना होगा?
- यह कारोबार के आकार पर निर्भर करेगा। छोटे कारोबारियों के लिए मासिक या सालाना शुल्क पर बाजार में कई सीए या आईटी समाधान मौजूद होंगे।
9. बिलिंग, रिटर्न या अन्य अनुपालनों पर कितना खर्च आ सकता है?
- एनएसडीएल ई-गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने सालाना 9,000 तक इनवॉयस दाखिल करने वाले एसएमई के लिए आईटी एप्लीकेशन की कीमत 2,700 रुपये सालाना तय की है। आगे यह दर और घट सकती है।