भारतीय दिवालिया एवं ऋण शोधन बोर्ड (आईबीबीआई) ने कहा कि एस्सार स्टील और बिनानी सीमेंट की कीमत अधिक से अधिक रखने को मंजूरी देने के संदर्भ में उसे कोई विरोधाभास नहीं हुआ। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनएलसीटी) की अहमदाबाद पीठ ने रुइया के 54,389 करोड़ रुपये के समाधान सौदे को ठुकराते हुए आर्सेलर मित्तल के 42,000 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। हाल ही में बिनानी सीमेंट मामले में एनसीएलटी की कोलकाता पीठ में अल्ट्राटेक सीमेंट की समाधान प्रक्रिया को मंजूरी दी थी।
अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा पेश की गई पेशकश डालमिया भारत समूह द्वारा पेश की गई पेशकश से अधिक है। मामले में कॉरपोरेट समाधान योजना की अधिकांश कीमत को लेकर भारी चर्चा हुई। एस्सार स्टील और बिनानी सीमेंट समाधान मुद्दे पर पूछे जाने पर आईबीबीआई के चेयरमैन एमएस साहू ने कहा कि नियमों के आधार पर पहले मंजूरी पा चुकी बिनानी को शेयरधारकों के हित को संतुलित न करने के कारण बाद में खारिज कर दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि अधिकांश मूल्य कर्जदार की संपत्ति है न कि कर्जदार की। यह वित्तीय संस्थानों द्वारा वसूली नहीं बल्कि कॉरपोरेट कर्जदारों के लिए अधिकांश मूल्य है। अगर कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) से इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह बिनानी के साथ साथ आर्सेलर मित्तल के लिए भी मान्य है। उन्होंने आगे कहा कि वाणिज्यिक मामलों में सीओसी सर्वोच्च है लेकिन सर्वोच्चता कानून के दायरे में रहनी चाहिए।