आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण बीता साल मानव समाज के लिए सबसे कठिन रहा और इस दौरान रिजर्व बैंक की नीतियों ने महामारी के गंभीर आर्थिक प्रभावों को कम करने में मदद मिली।
कोविड-19 से दुनिया भर के देशों के बीच आर्थिक व सामाजिक कमजोरियां और व्यापक हुई हैं। लिहाजा यह जरूरी है कि महामारी के बीच और उसके बाद वित्तीय प्रणाली के प्रबंधन के लिए ठोस व समझदारी भरा रुख अपनाया जाए।
दास ने शनिवार को 39वें नानी पालकीवाला स्मृति व्याख्यान में कहा, कोविड-19 के दौरान प्रमुख लक्ष्य आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देना था। जब हम पीछे देखते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि हमारी नीतियों की वजह से महामारी के आर्थिक प्रभाव को कम करने में मदद मिली।
साथ ही कहा कि मैं कहूंगा कि रिजर्व बैंक जरूरत के मुताबिक आगे और उपायों के लिए भी पूरी तरह तैयार है। हम वित्तीय स्थिरता कायम रखने को प्रतिबद्ध हैं। वित्तीय स्थिरता सार्वजनिक चीज है और सभी अंशधारकों को इसका संरक्षण व देखभाल करने की आवश्यकता है।
दास ने कहा, आरबीआई ने अपने नीतिगत प्रयासों से अत्याधुनिक राष्ट्रीय भुगतान ढांचा खड़ा कर रहा है। इससे एक सुरक्षित, प्रभावी और मजबूत भुगतान तंत्र तैयार हो सकता है। केंद्रीय बैंक एक ऐसा अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है, जिससे विनियम वाली इकाइयों के लिए नए अवसर तैयार हो सकें।