स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि शेयर बाजार में उछाल को अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत नहीं माना जा सकता है। महामारी से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज का दूसरा चरण जरूरी है। मोरेटोरियम सुविधा खत्म होने के बाद सितंबर से बैंकों का एनपीए बढ़ने लगेगा।
कृषि क्षेत्र पर भी ज्यादा निर्भरता नहीं रह सकती। अगर यह 1951-52 की 15.6 फीसदी की सबसे तेज वृद्धि भी हासिल करता है, तो भी विकास दर को 2 फीसदी का सहारा दे सकेगा। लिहाजा सरकार को राहत पैकेज के दूसरे चरण के बारे में सोचना होगा। खर्च में बड़ी गिरावट आई है, जो प्रति क्रेडिट कार्ड 12 हजार से 3,600 पर और प्रति डेबिट कार्ड 1 हजार से 350 रुपये पर आ गई है।
महामारी और लॉकडाउन की वजह से 2020-21 में राज्यों की जीडीपी का आकार 1.4-14.3 फीसदी तक कम हो जाएगा। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बताया है कि सबसे ज्यादा प्रभावित असम, गोवा, गुजरात, सिक्किम और हरियाणा जैसे राज्यों की जीडीपी में दहाई अंकों की गिरावट आएगी।
लॉकडाउन का सबसे कम असर यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, पंजाब और आंध्रप्रदेश पर हुआ है। जो राज्य कृषि क्षेत्र पर ज्यादा निर्भर रहे हैं, उन्हें सबसे कम नुकसान होगा। इसके अलावा बैंकिंग और आईटी जैसे सेवा क्षेत्र पर निर्भर राज्यों को भी राहत मिलेगी।
राजस्व पर असर पड़ने से जिन राज्यों के कुल राजस्व में उनके अपने कर का हिस्सा अधिक होगा, उनकी जीडीपी पर भी ज्यादा प्रभाव दिखेगा। ऐसे राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और हरियाणा आते हैं।