आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण देश की आर्थिक वृद्धि बहुत ज्यादा प्रभावित हुई है। भविष्य में जरूरत पड़ी तो अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ब्याज दरों में और कटौती करेंगे।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के मिनट्स जारी करते हुए केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा, अभी मौद्रिक दरों में कमी की गुंजाइश है। हालांकि, इस स्थिति में साधन को बचाए रखना और जरूरत पड़ने पर विवेकपूर्ण तरीके से इसका इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।
इस महीने की शुरुआत में दास की अध्यक्षता में आयोजित एमपीसी बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 4 फीसदी पर रखने का फैसला किया गया था। हालांकि, समिति ने अपना रुख उदार बनाए रखा था। इससे संकेत मिलते हैं कि आगे नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश है।
दास ने कहा, मैं अक्तूबर, 2019 से लगातार कह रहा हूं कि मौद्रिक नीति को आर्थिक सुधार प्रक्रिया को मजबूती देने के लिए तैयार किया गया है। एमपीसी की अगली बैठक 29 सितंबर से 1 अक्तूबर के बीच हो सकती है।
महंगाई ने बांध रखे थे हाथ : गवर्नर
दास ने कहा कि कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण और खुदरा महंगाई ने हाथ बांध रखे थे, जिससे रेपो रेट घटाना संभव नहीं हो सका। उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य खुदरा महंगाई की दर को 4 फीसदी के दायरे में रखने का है, जो 2 फीसदी ऊपर या नीचे हो सकता है।
फिलहाल खुदरा महंगाई 6 फीसदी से ऊपर बनी हुई है, जिससे रेपो रेट में कटौती नहीं करने का काफी दबाव था। दास ने कहा, आर्थिक वृद्धि की रफ्तार में तेज गिरावट की आशंका वाली स्थिति में खाद्य और ईंधन को छोड़कर पूरे खाद्य व उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर दबाव गंभीर चिंता का विषय है।
नकारात्मक रहेगी विकास दर
दास ने कहा कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे खुल रही है। आपूर्ति क्षेत्र की मुश्किलें कम हो रही हैं और मूल्य की जानकारियां प्रदान करने का स्वरूप स्थिर हो रहा है। ऐसे में आर्थिक वृद्धि को लेकर किसी स्पष्ट अनुमान तक पहुंचने के लिए इंतजार करना बेहतर होगा।
हालांकि, वर्तमान हालात को देखें तो इस साल की पहली छमाही में वास्तविक जीडीपी में गिरावट आ सकती है, जबकि 2020-21 के दौरान विकास दर नकारात्मक रहेगी। वहीं, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एवं एमपीसी के सदस्य माइकल देबब्रत पात्रा ने कहा, अर्थव्यवस्था जब भी सुधरेगी, इसकी प्रक्रिया धीमी होगी।