आरबीआई ने शुक्रवार को कहा कि मध्यम अवधि के लिए भारत का वर्तमान महंगाई लक्ष्य अगले पांच वर्षों के लिए उपयुक्त है। इसके तहत केंद्रीय बैंक मध्यम अवधि में 4 फीसदी के महंगाई लक्ष्य को पाने के लिए इसे 2-6 फीसदी के दायरे में रखने की कोशिश करता है।
आरबीआई ने ईंधन और खाद्य कीमतों के कारण होने वाली ऊंची एवं अस्थिर महंगाई को काबू में करने के लिए 2016 में लचीले महंगाई लक्ष्य ढांचे को अपनाया था। नियमों के मुताबिक, तय दायरे की समीक्षा हर पांच साल पर की जाती है। आरबीआई महंगाई को ध्यान में रखकर ही अपनी मौद्रिक नीति तय करता है।
आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हर निश्चित अंतरात पर खुदरा महंगाई के लक्ष्य की समीक्षा होनी चाहिए, चाहे भले ही कानूनन इसकी जरूरत न हो। यह समझना जरूरी है कि अगले पांच वर्ष के लक्ष्य तय करते समय भविष्य में होने वाले संरचनागत बदलावों और आर्थिक झटकों का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।
दिसंबर, 2020 में खुदरा महंगाई आरबीआई के 2-6 फीसदी के सुविधाजनक दायरे में आ गई है। इससे पहले लगातार आठ महीने से यह इस तय लक्ष्य से ऊपर चल रही थी क्योंकि महामारी और लॉकडाउन के कारण आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई थी।
इससे पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने कहा था कि मांग पक्ष के कारकों को चिह्नित करने के लिए भारत के महंगाई लक्ष्य के दायरे को दोबारा परिभाषित करने की जरूरत है।