मूडीज ने पिछले साल 13 साल से अधिक अवधि के बाद भारत की संप्रभु साख को सुधार कर बीएए2 कर दिया है और परिदृश्य को स्थिर रखा। रेटिंग में सुधार करते हुए मूडीज ने कहा था कि लगातार आर्थिक और सांस्थानिक सुधारों से देश के विकास की संभावना सुधरी है।
विशाल सरकारी वित्तीय घाटा और कर्ज के भारी बोझ के कारण देश की साख के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसकी वित्तीय ताकत है। उदाहरण के लिए भारत का साधारण सरकारी कर्ज और जीडीपी का अनुपात करीब 70 फीसदी है। इसके मुकाबले बीएए रेटिंग वाले अन्य देशों का औसत करीब 50 फीसदी है।
फोस्टर ने कहा कि भारत के वित्तीय पहलुओं के मजबूत होने और समग्र संप्रभु क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार के लिए वित्तीय घाटा कम करने की सरकार की प्रतिबद्धता को बरकरार रखना अत्यधिक महत्वपूर्ण होगा।
कारोबारी साल 2018-19 में सरकार ने वित्तीय घाटा को घटाकर जीडीपी के 3.3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले कारोबारी साल में 3.53 फीसदी था। चार साल के अंतराल के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा मुख्य ब्याज दर में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी किए जाने के बारे में पूछे जाने पर फोस्टर ने कहा कि रेटिंग के लिहाज से इससे महंगाई कम करने और अधिक टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।