रेलवे पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के औद्योगिक क्षेत्रों को आंध्र प्रदेश व ओडिशा के बड़े बंदरगाहों के जरिये दक्षिण भारत से जोड़ने के लिए चार हजार किलोमीटर लंबा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाएगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर रेलवे के अगले बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
प्रस्तावित कॉरिडोर के दस्तावेज के मुताबिक, ये डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तीन रूट पर बनेंगे। पहला खड़गपुर (पश्चिम बंगाल) से विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) तक 1115 किलोमीटर ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर, दूसरा भुसावल से दनकुनी (पश्चिम बंगाल) 1673 किलोमीटर व राजखरसवां (झारखंड) से आंदल (पश्चिम बंगाल) 195 किलोमीटर लंबा ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर और तीसरा विजयवाड़ा से इटारसी (मध्य प्रदेश) तक 975 किलोमीटर लंबा नॉर्थ साउथ सब कॉरिडोर। जल्द ही डीएफसीसीआईएल इन कॉरिडोर का सर्वे शुरू करेगा और साल के अंत तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।
ये कॉरिडोर से ओडिशा के पारादीप, धामरा व गोपालपुर बंदरगाह और आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम, गंगावरम, काकीनाड़ा, कृष्णापट्टनम और मछलीपट्टनम बंदरगाह तक कनेक्टविटि उपलब्ध होगी, जिससे सामानों की आवाजाही आसान हो सकेगी। खड़गपुर-विजयवाड़ा कॉरिडोर ओडिशा के कलिनगर से होकर गुजरेगा, जो पहले से ही ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ा है।
डीएफसीसीआईएल पहले ही लुधियाना से दनकुनी (1856 किमी) तक ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर और दादरी से जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह (1504 किमी) तक वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है। इसमें 81 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन कॉरिडोर को 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।