लो कॉस्ट एयरलाइंस कंपनियों से लड़ने के लिए रेलवे ने एक नया प्लान तैयार किया है। इसके लिए देश के चार महानगरों के लिए चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को 12 घंटे के भीतर अपना सफर पूरा करने की कोशिश करेगा।
देश में लो कॉस्ट एयरलाइंस कंपनियां दिल्ली से मुंबई या फिर दिल्ली से कोलकाता का सफर अधिकतम 3 घंटे में पूरा कर लेती हैं। इसके चलते ज्यादातर लोग फ्लाइट से अपनी टिकट बुक कराते हैं, क्योंकि यह उतने ही पैसे में जल्दी से अपने गंतव्य तक पहुंच जाती हैं।
ट्रेन लेट और स्पीड कम होने से पड़ता है असर
रेलवे शताब्दी, राजधानी, दुरंतो जैसी ट्रेनों को 12 घंटे से कम समय में पहुंचाने का प्लान लेकर आई है। इसके लिए इन ट्रेनों को समय पर पहुंचाने के लिए रेल मंत्रालय एक योजना पर काम कर रहा है।
योजना के अनुसार अभी कई जगह पर वीवीआईपी ट्रेन भी लेट हो जाती हैं क्योंकि ट्रैक काफी पुराना हो चुका है, जिससे रेलवे को धीमी स्पीड पर ट्रेन चलानी पड़ती हैं। ट्रैक को सुधारने के लिए रेलवे 18 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगी। फिलहाल दिल्ली- मुंबई और दिल्ली-कोलकाता के ट्रैक की स्पीड को 110 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाया जा सके।
देश के व्यस्ततम रेल रुट में शुमार दिल्ली-हावड़ा रुट पर अगले तीन साल में गाड़ियों की रफ्तार को 200 किलोमीटर प्रति घंटे किया जाएगा। 1500 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक को सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने के लिए इस साल के बजट में 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इससे दिल्ली से कोलकाता तक का सफर 12 घंटे में तय किया जा सकेगा। अभी राजधानी एक्सप्रेस को दिल्ली से कोलकाता का सफर तय करने में 17 घंटे से अधिक का वक्त लगता है।
बनेंगे अंडरपास, पुल और क्रंकीट की दीवार
इस योजना के तहत रेलवे इस पूरे रुट पर जितनी भी क्रांसिंग हैं, उनको बंद करेगा और इसके स्थान पर अंडरपास और ओवरब्रिज का निर्माण करेगा। रुट पर पुरानी पटरियों को बदला जाएगा, जिनकी हालत इतना भार झेलने के लिए माफिक नहीं हैं।
रेलवे अपनी इस परियोजना के तहत किस्तों में पैसा आवंटन करेगा। रेलवे के अधिकारी ने कहा कि 1500 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर रेल पटरियों के किनारे कंक्रीट की दीवार का निर्माण होगा।
जहां पर कंक्रीट की दीवार नहीं बन सकेगी वहां पर कंटीले तारों से बैरीकेडिंग की जाएगी। यह इसलिए किया जाएगा ताकि कोई जानवर, इंसान अथवा वाहन रेलवे लाइन के किनारे नहीं आए।