नॉन पर्फॉमिंग असेट (NPA) से परेशान सरकारी बैंकों ने अपने बैड लोन को राइट ऑफ कर दिया है। इस लोन की राशि 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इस वर्ष इसमें 41 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डाटा के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में यह 57,586 करोड़ रुपये रहा था।
5 सालों का सबसे बड़ा अमाउंट
डाटा के अनुसार, पिछले पांच सालों में यह अब तक का सबसे बड़ा अमाउंट है, जिसकों बैंकों ने राइट ऑफ किया है। वहीं बैंकों के प्रॉफिट पर भी असर पड़ा है। जहां 2012-13 में बैंकों ने 27 हजार करोड़ का बैड लोन माफ किया, वहीं प्रॉफिट 45849 करोड़ रुपये था।
इस वित्त वर्ष में बैंकों का लाभ 474 करोड़ रुपये रहा। बैंक पिछले पांच सालों में कुल मिलाकर के 2.46 लाख रुपये का बैड लोन माफ कर चुके हैं।