आम्रपाली के लटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करना आसान काम नहीं है। इसके लिए एनबीसीसी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 42 हजार से ज्यादा घर खरीदारों के हक में फैसला सुनाते हुए मंगलवार को आम्रपाली का रेरा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए एनबीसीसी को यह निर्देश दिया है कि वह आम्रपाली की अटकी परियोजनाओं को पूरा करे। अदालत ने निवेशकों को यह निर्देश भी दिया है कि अब वह पैसे एनबीसीसी को दें।
एनबीसीसी के लिए सबसे बड़ी अड़चन होगी फंड जुटाना। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रेनो अथॉरिटी करीब छह हजार करोड़ के कर्ज तले दबी है। इतना ही नहीं, अब निर्माण की लागत भी काफी बढ़ गई है। इसलिए एनबीसीसी के लिए फंड जुटाना एक बहुत बड़ी अड़चन है।
फंड के अतिरिक्त महंगाई भी एक बड़ी अड़चन हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि करीब नौ साल पहले फ्लैट के दाम तय किए गए थे। यह दाम मजदूरी, सीमेंट, सरिया व अन्य सामग्री के दामों के हिसाब से तय हुए थे। लेकिन नौ सालों में महंगाई काफ बढ़ी है। इन सामग्रियों के कम से कम 20 से 40 फीसदी दाम बढ़े हैं। इसके साथ ही जीएसटी व अन्य टैक्स दरों में भी इजाफा हुआ है। इसलिए निर्माण में देरी संभव है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को खरीदारों के हित में एक प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया है। इससे खरीदारों की समस्या का समाधान करने के बाबत कहा गया है। अब केंद्र सरकार का संबंधित मंत्रालय प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर रहा है। इससे खरीदारों को पता चलेगा कि केंद्र ने उनके लिए क्या समाधान योजना निकाली है।
फिलहाल आम्रपाली के करीब 4885 फ्लैट नहीं बिके हैं। इन्हें बेचने पर 2700 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इस रकम को बायर्स की बकाया रकम से मिलाने के बाद चार हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि होगी।