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RERA का एक सालः देश के 14 राज्यों में पोर्टल भी नहीं, बायर्स को नहीं मिल रही है किसी तरह की मदद

Fri, 27 Apr 2018 03:11 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रियल एस्टेट पर अपने शिकंजे को कसने और घर खरीदारों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए रियल एस्टेट रेग्यूलेशन एक्ट (रेरा) को लागू हुए पहली मई को एक साल हो जाएगा। लेकिन इस एक्ट के लागू हो जाने के बाद भी बायर्स को किसी तरह को कोई फायदा धरातल पर नहीं मिला है। इससे बायर्स के मन में इस एक्ट को लेकर संदेह बना हुआ है, क्योंकि कई राज्यों में इसके लिए पोर्टल तक नहीं बना है। 

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20 राज्यों ने किया नोटिफाई
जम्मू-कश्मीर को छोड़कर के पूरे देश में रेरा कानून लागू है। इन 28 राज्यों मे भी केवल तीन ने ही अपने स्थाई रेग्यूलेटर को नियुक्त किया है। वहीं 20 राज्यों में इसका नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इसके बावजूद 14 राज्यों ने रेरा के लिए अलग से पोर्टल शुरू किया है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी नाइट फ्रैंक के मुताबिक इतना होने के बाद भी ग्राहकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 

इन राज्यों ने शुरू नहीं किया वेबपोर्टल
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब ने ही केवल स्थाई तौर पर रेग्यूलेटर को नियुक्त किया है। अन्य राज्यों ने केवल इस पद पर अस्थाई तौर पर रेग्यूलेटर की नियुक्ति की गई है। हालांकि असम, हरियाणा, केरल, तेलंगाना और ओडिशा ने अभी तक रेरा के लिए अलग से पोर्टल नहीं शुरू किया है। 
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इन राज्यों के पोर्टल नहीं मिलती पूरी जानकारी
यूपी, बिहार, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों रेरा के पोर्टल पर जो जानकारी डेवलपर्स द्वारा अपलोड की जा रही है वो बायर्स के लिए नाकाफी है। ऐसा इसलिए क्योंकि रेरा के तहत सभी चल रहे प्रोजेक्ट्स के बारे में अगस्त 2017 तक रजिस्ट्रेशन करना होगा। लेकिन ऐसे कई प्रोजेक्ट्स जिनको पजेशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है और वो रेरा में रजिस्टर्ड नहीं हो सके हैं। 

पश्चिम बंगाल सरकार ने नहीं किया नोटिफाई
रिपोर्ट के मुताबकि पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने इस कानून को अभी तक नोटिफाई भी नहीं किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के सभी राज्य भी इसी कतार में शामिल हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो राज्य सरकार भी इसे लागू करने में फिसड्डी साबित हो गई हैं। ऐसे में कैसे बिल्डर्स धोखाधड़ी करने से बाज आएंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। 

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