रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सात शहरों में साल 2017 की चौथी तिमाही की तुलना में साल 2018 की पहली तिमाही में मकानों की बिक्री में 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो दर्शाता है कि क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा वित्तीय अनुशासन का माहौल बनने से लोग मकानों की खरीद के लिए आकर्षित हुए हैं।
कोलकाता में बिक्री सर्वाधिक 42 फीसदी बढ़ी
मकानों की कुल बिक्री में 80 फीसदी हिस्सेदारी एनसीआर, एमएमआर, बंगलूरू तथा पुणे की रही। कोलकाता में साल 2018 की पहली तिमाही में मकानों की बिक्री 42 फीसदी बढ़कर 3,400 इकाई रही, जो साल 2017 की चौथी तिमाही में 2,400 इकाई रही थी।
वहीं, आलोच्य अवधि में बंगलूरू तथा पुणे में मकानों की बिक्री पिछली तिमाही की तुलना में 15 फीसदी बढ़कर क्रमश: 11,500 इकाई तथा 6,800 इकाई रही। एमएमआर में साल 2018 की पहली तिमाही में रिहायशी मकानों की बिक्री 12 फीसदी बढ़कर 12,300 इकाई रही, जो साल 2017 की चौथी तिमाही में 11,000 इकाई थी।
दिल्ली-एनसीआर में मकानों की बिक्री 11 फीसदी बढ़कर 9,100 इकाई रही, जो साल 2017 की चौथी तिमाही में 8,200 इकाई थी। वहीं, हैदराबाद में यह तीन फीसदी बढ़कर 3,800 इकाई रही।
चेन्नई में बिक्री घटी
चेन्नई में हालांकि साल 2018 की पहली तिमाही में मकानों की बिक्री 12 फीसदी घटकर 2,300 इकाई रही, जो साल 2017 की चौथी तिमाही में 2,600 इकाई थी। कंसल्टेंट ने कहा कि पिछले साल की चौथी तिमाही की तुलना में साल 2018 की पहली तिमाही में रिहायशी मकानों की कीमतें एक खास दायरे में ऊपर-नीचे होती रहीं। इसका प्रमुख कारण काफी संख्या में अनबिके मकानों के साथ मांग में सीमित मात्रा में सुधार रहा।