रियल एस्टेट क्षेत्र मकान खरीदारों में भरोसा नहीं जगा पा रहा है। यही कारण है कि रियल एस्टेट बाजार के धारणा सूचकांक में गिरावट आई है। खास बात है कि यह गिरावट उस स्तर पर पहुंच गई है, जितनी नोटबंदी के दौरान आई थी।
नाइटफ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं एमडी शिशिर बैजल ने कहा कि सरकार की ओर किए गए उपायों के बावजूद मांग में गिरावट से हितधारकों की धारणा निराशाजनक स्तर पर पहुंच गई है। ऐसा पहली बार है, जब हितधारक अगले छह महीने तक रियल एस्टेट क्षेत्र और पूरी अर्थव्यवस्था में होने वाली गतिविधियों को लेकर सावधान हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से आपूर्ति पक्ष की चुनौतियों के समाधान के लिए उपायों की घोषणा किफायती आवास सेगमेंट पर ज्यादा केंद्रित हैं। यह हितधारकों में विश्वास पैदा करने के लिए काफी नहीं है क्योंकि बड़ी चुनौतियां मांग पक्ष की राह में है।
प्रॉपर्टी ब्रोकरेज कंपनी प्रॉपटाइगर के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में देश के प्रमुख नौ शहरों में मकानों की बिक्री 25 फीसदी घटकर 65,799 इकाई रह गई है। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 88,078 इकाई रहा था। इस दौरान नए मकानों के लॉन्च में भी 45 फीसदी की गिरावट आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में मकानों की बिक्री 28,563 से घटकर 21,985 इकाई रह गई। वहीं, गुरुग्राम में बिक्री 3,988 से घटकर 2,742 और नोएडा में 6,528 से घटकर 2,827 इकाई रह गई। जबकि इससे पहले एनारॉक और जेएलएल इंडिया की आई रिपोर्ट में भी बिक्री में क्रमश: 18 और एक फीसदी की गिरावट की बात कही गई थी।