देश का रियल एस्टेट क्षेत्र भी सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। इसका असर मकानों की बिक्री पर भी पड़ रहा है। संपत्ति सलाहकार कंपनी जेएलएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मकानों में ग्राहकों की दिलचस्पी कम होने से देश के सात प्रमुख शहरों में 4.62 लाख करोड़ रुपये की आवासीय परियोजनाएं अटकी हुई हैं।
संपत्ति सलाहकार सीबीआरई के सर्वे के मुताबिक, जीएसटी लागू होने के बाद से गोदामों के लिए गुणवत्तापूर्ण जगह की मांग तेजी से बढ़ी है। इस कारण 2017 के बाद से औद्योगिक और लॉजिस्टिक सेगमेंट ने 50 करोड़ डॉलर (करीब 3,500 करोड़ रुपये) का निवेश आकर्षित किया है।
सर्वे में शामिल 70 फीसदी उत्तरदाताओं का कहना है कि ई-वे बिल के कारण कारोबारी सुगमता में सुधार हुआ है। इससे कार्गो स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट प्रॉसेस की काफी बाधाएं खत्म हुई हैं। वहीं, 40 फीसदी का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद से गोदामों की संख्या बढ़ी है।
सीबीआरई ने कहा कि आने वाले समय में गोदामों की मांग बढ़ेगी और इस साल गोदाम लेने के लिए जगह की मांग पिछले साल के मुकाबले 10-15 फीसदी बढ़कर 2.5 से तीन करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच सकती है।