पांच जुलाई को पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकती हैं। ऐसे में आम लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। रियल एस्टेट सेक्टर भी अगामी बजट से कई प्रोत्साहन पाने की उम्मीद कर रहा है।
रियल एस्टेट सेक्टर इस समय फंड की कमी से जूझ रहा है। टॉप सात शहरों में रियल एस्टेट के कई प्रोजेक्ट्स अटके पड़े हैं। उन्हें पूरा करने के लिए तरलता (लिक्विडिटी) की जरूरत है। सरकार को बजट में इस मुद्दे का हल निकालने के लिए कदम उठाने होंगे। पूंजी तरलता की कमी कंपनियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है और वित्तीय क्षति को और बढ़ा रही है।
सरकार ने सभी के लिए 2022 तक आवास देने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए जरूरी है कि किफायती आवास परियोजनाओं (अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट) के लिए जमीन खरीदने की इच्छा रखने वाले डेवलपर्स को सरकार कम ब्याज पर फंड और जमीन उपलब्ध कराए। इसके साथ ही नेशनल रेंटल हाउसिंग पॉलिसी को तय किया जाए। इसके अलावा, कारोबार करना आसान बनाने के लिए सभी तरह की अनुमति एक ही जगह पर और बेहतर की जाए। इससे प्रोजेक्ट लागत में कमी आएगी और प्रोजेक्ट का काम जल्द पूरा करना आसान हो जाएगा।
फरवरी में जब अंतरिम बजट पेश किया गया था तो आम लोगों को काफी फायदा दिया गया था। आयकर स्लैब में कमी, हाउसिंग लोन में बड़ी राहत दी थी। लेकिन वह काफी नहीं था। अगर सरकार आयकर कानून की धारा 80सी के तहत आवास ऋण के मूल की वापसी पर अलग से डेढ़ लाख रुपये तक की कर छूट दे तो इससे घर खरीदारों को बड़ी बचत होगी। इसके साथ ही पहली दफा घर खरीदने वाले को प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत मिलने वाली छूट की सीमा को बढ़ाने की जरूरत है। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।
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भारत में रियल एस्टेट सेक्टर में विदेशी निवेशकों को अधिक से अधिक आकर्षित करने की जरूरत है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की जरूरत है जहां निवेशकों को प्रोत्साहन मिले, जिससे अधिक से अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। इसके लिए नियम को सरल बनाने की जरूरत है। इसके लिए रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का दर्जा देने की की जरूरत है। इससे पूरे सेक्टर की हालत को बदल सकती है, क्योंकि इससे कम दरों पर फंड्स प्राप्त करने में मदद मिलेगी और सेक्टर के प्रत्येक हिस्से को लाभ होगा। इससे इस सेक्टर में निवेश भी बढ़ेगा।