केंद्र सरकार मनी लांड्रिंग के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त की गई अचल संपत्तियों का रखरखाव करने और उनसे आय अर्जित करने का जिम्मा नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को दे सकती है।
आरोपियों की संपत्ति को देगा किराये पर
वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव पर वित्त सचिव हंसमुख अढिया की अध्यक्षता में 13 मार्च को एक बैठक हुई थी जिसमें मंत्रालय के अधिकारियों के साथ ईडी प्रमुख करनाल सिंह और एनबीसीसी के सीएमडी अनूप कुमार मित्तल शामिल हुए।
बैठक में भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे आरोपियों की संपत्तियों के रखरखाव के तरीकों पर चर्चा की गई। साथ ही, उन संपत्तियों को किराये पर देने और उनकी नीलामी के विकल्पों पर भी विचार किया गया।
ईडी को नहीं है रखरखाव का अनुभव
छह महीने पहले लाए गए इस प्रस्ताव के अनुसार ईडी को जब्त की गई संपत्तियों के रखरखाव का अनुभव नहीं है। इसलिए कई मामलों में जब्त की गई संपत्तियों के क्षरण का खतरा होता है। इसके अलावा ईडी को उनके रखरखाव पर काफी रकम भी खर्च करनी पड़ रही है। ऐसी संपत्तियों में कई एकड़ जमीन के अलावा फ्लैट, फैक्ट्री और दुकानें शामिल हैं। ईडी द्वारा उन्हें पर किराए पर देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
सरकारी उपक्रम एनबीसीसी की एक विशेष सब्सिडियरी जब्त संपत्तियों के रखरखाव का काम कर रही है। अगर उसे ईडी द्वारा जब्त संपत्तियों के मेंटीनेंस का काम मिलता है तो इससे खुफिया और पुलिस विभाग द्वारा की गई कार्रवाई में जब्त संपत्तियों के रखरखाव का काम मिलने का रास्ता साफ होगा।