रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय से भारतीय रियल्टी क्षेत्र भारी तादाद में अनबिके मकानों, खरीदारों के विश्वास में कमी, परियोजनाओं में विलंब तथा नकारात्मक नकद प्रवाह की समस्या से जूझ रहा है। हालांकि पिछले दो वर्षों में घोषित विकास को बढ़ावा देने वाली कई नियामकीय गतिविधियों तथा पहल ने भविष्य में क्षेत्र की मजबूत वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि संस्थागत निवेशकों ने साल 2018 में अब तक चार अरब डॉलर का निवेश किया है और कुल सौदा 15 करोड़ डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जो बीते पांच वर्षों में सर्वाधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में कुल सौदा तीन गुना बढ़कर 15.7 करोड़ डॉलर का रहा, जबकि यह आंकड़ा साल 2016 में 4.7 करोड़ डॉलर था।
कुल 44 फीसदी विदेशी निवेश
साल 2018 में आए कुल निवेश में से लगभग 44 फीसदी विदेशी निवेशकों खासकर अमेरिका, कनाडा तथा सिंगापुर से आए। साथ ही, 90 फीसदी से अधिक विदेशी निवेश मुंबई, पुणे, बंगलूरू तथा हैदराबाद में किया गया।
अध्ययन के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने कुल 14.9 करोड़ डॉलर का सौदा किया, जबकि घरेलू निवेशकों ने 8.7 करोड़ डॉलर का सौदा किया। इन घरेलू निवेशकों ने वाणिज्यिक क्षेत्र में 95.9 करोड़ डॉलर तथा रिहायशी क्षेत्र में 87 करोड़ डॉलर की परियोजनाओं में निवेश किया।
कुल मिलाकर, मुंबई सबसे पसंदीदा निवेश स्थल बनकर उभरा, जहां कुल 53 फीसदी (दो अरब डॉलर) निवेश किया गया।