रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदारों और कंपनियों में निवेशकों को लोकसभा में एक बड़ी राहत मिली है। सदन में बृहस्पतिवार को पारित हुए दिवालिया एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून संशोधन विधेयक के बाद अब घर खरीदार और निवेशक भी दिवालिया घोषित कंपनी के ऋणदाता माने जाएंगे। इससे कंपनी से मिलने वाली रकम में इनका भी हिस्सा होगा। उच्च सदन में यह बिल सोमवार को पारित हो चुका है।
वित्त एवं कंपनी मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा, बिल में कंपनियों की दिवालिया प्रक्रिया पूरी करने के लिए तय समयसीमा को 270 से बढ़ाकर 330 करने का भी प्रावधान है। यह फरवरी में लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा। उन्होंने कहा, पुराने कानून के सात खंडों को संशोधित किया जाना है।
अब दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के आवेदन के समय ही उसके पूरे करने की समय सीमा तय होगी। साथ ही वित्तीय लेनदारों के संकट का भी निवारण किया जाएगा। सीतारमण ने कहा, इन मामलों को निपटाने में केंद्र, राज्य और संबंधित प्राधिकरणों की भी जिम्मेदारी होगी।
गबन करने वालों को अब राहत नहीं
निर्मला सीतारमण ने एनसीएलएटी के फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि नये कानून में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को साफ तौर पर आधार बनाया गया है कि अब गबन करने वालों को कोई राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि एस्सार स्टील लिमिटेड के एक मामले में न्यायाधिकरण ने कर्जदाताओं के समूह की भूमिका को खत्म कर वित्तीय लेनदार और सेवा प्रदाताओं को मुख्य भूमिका में शामिल कर दिया था।
केंद्र कंपनियों को बचाने का प्रयास करे: गोगोई
कांग्रेस नेता गोगोई ने कहा केंद्र सरकार कंपनियों की तरलता बढ़ाकर उसे बचाने का प्रयास करे। गोगोई ने खासतौर पर रियल एस्टेट कंपनियों की स्थिति पर चिंता जताई और कहा घर खरीदार अपने जीवन की पूरी पूंजी इसमें लगाता है। इसके डूबने का संकट बहुत भयावह है।