आम्रपाली की तर्ज पर यूनिटेक के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी एनबीसीसी को दी जा सकती है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यूनिटेक के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का काम एनबीसीसी को दिया जा सकता है। लिहाजा शीर्ष अदालत ने यूनिटेक के होम बायर्स को अपना सुझाव देने के लिए कहा है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सोमवार को कहा कि एनबीसीसी यूनिटेक केप्रोजेक्ट्स को अपने हाथ में ले सकता है। वेणुगोपाल ने इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पीठ केसमक्ष रखा। इस प्रस्ताव के मुताबिक, एनबीसीसी को एडवांस के तौर पर 50 करोड़ रुपये दिया जाए और निर्माण कार्य पूरा करने के बाद कमीशन के तौर पर मिलने वाली रकम को एडजस्ट कर लिया जाएगा।
साथ ही अटार्नी जनरल ने कहा कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्ष में एक समिति का गठन किया जाए। समिति निर्माण कार्य पर निगरानी रखेगी जिससे कि समयबद्ध तरीकेसे होम बायर्स को फ्लैट मिल सके। जिसके बाद पीठ ने होम बायर्स को इस पर अपना सुझाव पेश करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई नौ अगस्त को होगी।
सुनवाई के दौरान होम बायर्स की ओर से पेश वकील एमएल लाहौटी ने कहा कि एनबीसीसी को पहले ही आम्रपाली के करीब 42 हजार फ्लैट को बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। यूनिटेक के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में करीब 22 हजार फ्लैट का निर्माण बाकी है। ऐसे में यह एनबीसीसी को गंभीरता से पूरे काम को अंजाम देने की जरूरत है। बहरहाल कोर्ट ने कोर्ट सलाहकार को होम बायर्स से सलाह कर इस बारे में सुझाव देने केलिए कहा है। अगली सुनवाई नौ अगस्त को होगी।
मालूम हो कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली का रेरा पंजीकरण रद्द कर दिया था और उसके प्रोजेक्टस को पूरा करने की जिम्मेदारी एनबीसीसी को सौंप दी थी।