रविवार को जीएसटी काउंसिल ने अर्फोडेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट पर टैक्स की दर को 8 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करने का भी निर्णय लिया है और निर्माणाधीन संपत्तियों पर पांच फीसदी जीएसटी का निर्णय लिया है। मेट्रो शहरों में 60 वर्ग मीटर तक के कारपेट एरिया वाले घरों को अफोर्डेबल हाउसिंग की श्रेणी में रखा गया है। गैर मेट्रो शहरों में 90 वर्ग मीटर तक के कारपेट एरिया वाले घरों को किफायती आवास की श्रेणी में रखा गया है। इससे ग्राहकों को फायदा होगा।
काउंसिल के इस फैसले से संपत्ति खरीदारों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। उनको फ्लैट खरीदते समय कम जीएसटी देनी होगा, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि डेवलपर्स का इनपुट क्रेडिट कम कर दिया है, जिससे निर्माण की लागत बढ़ जाएगी। इससे कीमतें बढ़ सकती हैं।- अमित मोदी, उपाध्यक्ष क्रेडाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश
जीएसटी काउंसिल की सिफारिशें सभी के लिए उनके सपनों के घर की दिशा में एक बड़ा कदम है। खासकर यह आम जनता के बेहतर भविष्य के लिए एक बड़ा कदम है। देश की अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट का बड़ा योगदान है। उसे देखते हुए आने वाले समय में इसका फायदा सभी को मिलेगा। - आरके अरोड़ा, चेयरमैन सुपरटेक
अफोर्डेबल हाउसिंग पर 1 प्रतिशत और निर्माणाधीन संपत्तियों पर जीएसटी को 12 से घटाकर पांच प्रतिशत करने के निर्णय से सरकार के हाउसिंग फॉर ऑल योजना को और भी मजबूती मिलेगी। इस फैसले से घर खरीददारों को अपने सपने पूरे करने में और भी आसानी होगी और साथ ही घरों की मांग भी वृद्धि होगी। - मनोज गौड़, एमडी गौड़ ग्रुप
इस फैसले का हम सभी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर और खासकर घर खरीदारों के हित मे लिया गया है। पहले अंतरिम बजट में आयकर की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये तक करना और अब जीएसटी की दरों को घटाना बहुत ही सराहनीय कदम है।- दीपक कपूर निदेशक गुलशन होम्स