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अमर उजाला से बातचीत में बोले केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, लोग पसंदीदा कंपनी से ले सकेंगे बिजली

Mon, 23 Dec 2019 06:20 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्रीय बिजली मंत्री राज कुमार (फाइल फोटो)
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अगर आप बिजली की कीमतों, सेवा या अन्य वजह से परेशान हैं तो यह परेशानी दूर होने वाली है। सरकार ऐसे उपाय कर रही है, जिसके बाद कई कंपनियां आपके इलाके में बिजली उपलब्ध कराएंगी। जिस कंपनी की नियम और शर्तें सबसे बेहतर होंगी, उससे ही आप बिजली ले सकते हैं। बिजली क्षेत्र से जुड़े मसलों पर अमर उजाला के शरद गुप्ता एवं शिशिर चौरसिया ने केंद्रीय बिजली मंत्री राज कुमार (आरके) सिंह से बातचीत की। पेश है अंश :

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प्रश्न— ग्लोबल वॉर्मिंग के खतरे के बीच अब स्वच्छ बिजली उत्पादन पर दुनिया में जोर है। इसमें हमारी क्या स्थिति है?
उत्तर— मैं आपको बताना चाहूंगा कि अब भारत जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (सीपीपीआई) के मामले में दुनिया के शीर्ष-10 देशों में शामिल हो गया है। यह सूचकांक नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा के दक्ष उपयोग जैसे मानदंडों पर आधारित है। भारत ने 2022 तक 175 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। फिलहाल अक्षय ऊर्जा में 84 गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता स्थापित हो चुकी है। इसमें सौर ऊर्जा का हिस्सा 32 गीगावाट और पवन ऊर्जा का 37 गीगावाट शामिल है। यही नहीं, इस समय 36 गीगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापना के विभिन्न चरणों में हैं, जबकि 35 गीगावाट क्षमता के लिए बोली की प्रक्रिया चल रही है।

प्रश्न— बिजली वितरण में आप मल्टीपल सर्विस प्रोवाइडर की बात करते रहे हैं। यह कैसे काम करेगा और कब तक संभव हो पाएगा?
उत्तर— बिजली वितरण में मल्टीपल सर्विस प्रोवाइडर का सपना शीघ्र पूरा होने जा रहा है। आपको पता होगा कि हमने न्यू टैरिफ नीति तैयार की है, जिसमें इसका ही प्रावधान है। यह नीति बनाकर कैबिनेट को भेज दी गई है। वहां से मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद आप पसंदीदा कंपनी से बिजली ले सकेंगे। इस नीति में प्रावधान है कि बिजली तंत्र और बिजली बिक्री दोनों काम अलग-अलग कंपनियां करेंगी। वितरण तंत्र डिस्कॉम के ही पास रहेगा, लेकिन उसी तंत्र पर बिजली बेचने के लिए कई कंपनियां होंगी। वह ज्यादा खपत वाले ग्राहकों के लिए अलग दर रखेंगी और कम खपत वाले ग्राहकों के लिए अलग दर। पीक टाइम के लिए अलग दर रहेगी, जबकि सामान्य के लिए अलग दर। ऐसे में लोगों के पास एक से ज्यादा विकल्प होगा। अभी तो ग्राहकों को एक ही डिस्कॉम पर निर्भर रहना पड़ता है।
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प्रश्न— नुकसान बढ़ने के कारण वितरण कंपनियां निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इसका समाधान कैसे होगा?
उत्तर— बिजली वितरण कंपनियों का नुकसान ज्यादा है, जिसके कई कारण हैं। 2018-19 में इनका नुकसान करीब 27,000 करोड रुपये रहा था। देखिए... लोग समय पर बिजली बिल नहीं भरते हैं। सरकारी विभागों का भी यही हाल है। पूरे देश में सिर्फ सरकारी विभागों पर ही बिजली वितरण कंपनियों का करीब 42,000 करोड रुपये बकाया है। इसके अलावा, बिजली चोरी भी हो रही है। हमने इन गड़बड़ियों का समाधान स्मार्ट मीटर के रूप में खोजा है और तय किया गया है कि तीन साल में देश के हर ग्राहक के यहां प्रीपेड या स्मार्ट मीटर लगा दिए जाएंगे। इसके लिए ग्राहकों को ज्यादा पैसे भी नहीं खर्च करने होंगे।

प्रश्न— स्मार्ट मीटर से इसका समाधान कैसे निकलेगा?
उत्तर— स्मार्ट मीटर लग जाने के बाद ग्राहकों को पैसे जमा करने पर ही बिजली मिलेगी। इसमें लोगों को फायदा यह होगा कि वे अपनी आवश्यकता के अनुसार मीटर चार्ज करेंगे। उनकी बड़ी रकम सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में नहीं फंसी रहेगी। बिजली कंपनियों को फायदा यह होगा कि उनकी जितनी बिजली खपत होगी, उन्हें उसके पूरे पैसे मिलेंगे। उन्हें बिल बनाने, डिलीवरी करने, वसूली करने और बिल भुगतान नहीं होने पर बिजली काटने जैसी समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी। यही नहीं, डिस्कॉम के नुकसान को कम करने के लिए और तरीके भी ईजाद कर रहे हैं। आपको पता होगा कि हमने डिस्कॉम के लिए ‘उदय’ योजना शुरू की थी। इससे उनके नुकसान में कमी आई है और यह 22 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गया है।

प्रश्न— सरकार ई-वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। ज्यादा संख्या में ई-वाहन चार्ज करने के लिए अतिरिक्त बिजली मिल पाएगी?
उत्तर— जरूर मिलेगी। इस समय देश में कुल बिजली उत्पादन क्षमता 366 गीगावाट है, जबकि मांग करीब 180 गीगावाट है। इसका मतलब है कि हम अभी 186 गीगावॉट से भी ज्यादा अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर रहे हैं, जिसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह तो हमारे लिए अच्छा ही होगा कि ज्यादा-से-ज्यादा ई-वाहन बाजार में आए ताकि अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का उपयोग हो पाए। 

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