इरडा ने किया है नियमों में बदलाव
मिलेनियल्स को बीमा सुरक्षा की छतरी के तहत लाने का इरादा करते हुए, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने स्वास्थ्य बीमा विनियम, 2016 अधिसूचित किया हैं, जिनमें अन्य बातों के अलावा, एक व्यक्ति की उम्र के आधार पर प्रीमियम तय किया गया है। कम उम्र में ही बीमा खरीदने वालों को कम प्रीमियम अदा करने की आवश्यकता होती है और वे नो क्लेम बोनस के हकदार होते हैं। यह कदम बीमा की ओर नई पीढ़ी को आकर्षित करने और बीमाकृत रहने के लिए उठाया गया था।
इसी सिलसिले में कुछ बीमा कंपनियां बीमा में निवेश करने के लिए मिलेनियल्स को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिहाज से वैलनेस और प्रिवेंटिव केयर को अपने प्रोडक्ट्स के साथ जोड़ रही हैं। वे उपभोक्ताओं के साथ संवाद करते हैं और उन्हें नई सेवाओं और स्वस्थ रहने के तरीकों के बारे में जानकारी देते हैं। वे स्वास्थ्य शिविरों का संचालन करते हैं और साथ ही साथ उपभोक्ताओं को उनके बीमा संबंधी प्रीमियम के नवीकरण की तारीखों के बारे में जानकारी देते हैं। इन प्रयासों से संस्थान को कंपनी और ग्राहक के बीच विश्वास और संबंधों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
इन बीमारियों से होते हैं पीड़ित
40-50 मिलियन लोग किसी भी समय स्वास्थ्य संबंधी खतरे में होते ही हैं और अनगिनत संख्या ऐसे लोगों की है, जो हृदय संबंधी समस्याओं, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे जीवन शैली के रोगों से पीड़ित होते हैं। भारत में 356 मिलियन लोग 22-37 वर्ष की उम्र के हैं - यानी दुनिया में सबसे बड़ी युवा आबादी - ऐसी सूरत में चिकित्सा बीमा बेहद जरूरी हो जाता है।
बीमा बचाता है कर्ज के महाजाल से
पर्याप्त बीमा के बिना बीमारियों का इलाज करना आपकी बचत को नष्ट कर सकता है, आपके लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता को असंभव बना सकता है। नौकरी में हानि हो सकती है, और किसी को भी कर्ज के गहरे समंदर में फंसा सकता है और यहां तक कि उसे विनाश की तरफ भी धकेल सकता है। यानी एक अच्छा और उपयोगी स्वास्थ्य बीमा आपकी जिंदगी में मंडराते खतरों को कम करने में मदद कर सकता है।
आखिर में सबसे महत्वपूर्ण बात- भारत का भविष्य, इसका वित्तीय विकास और संपन्नता सब कुछ मिलेनियल्स के बेहतर स्वास्थ्य और उनके कल्याण में ही निहित है। मिलेनियल्स के बाद जरनेशन जेड है, जिसे कभी पता नहीं चलेगा कि जीवन वाई-फाई के बिना क्या है। इसलिए बीमा कंपनियों को अपनी हेल्थ केयर बेनिफिट्स संबंधी रणनीतियों को मिलेनियल्स के साथ-साथ इस पीढ़ी की अनूठी जरूरतों के अनुरूप डिजाइन करना चाहिए। कोशिश यह रहे कि जितनी जल्दी संभव हो, उन्हें बीमा की छतरी के नीचे लाया जाए।