कभी रात को नौ बजे ही सो जाने वाला देहरादून शहर अब नींद की आगोश में रात को 12 बजे के बाद ही जाता है। लेकिन, आर्थिक मामलों में दून का निवेशक अभी बहुत कुछ चुनिंदा ही है। सुरक्षित निवेश की तलाश अब भी जारी है। भारी बचत की आदत से लाचार शहर के बाशिंदों को अब भी बैंकिंग इंस्ट्रूमेंट में निवेश का विकल्प दिखाई दे रहा है।
स्टाक में तीन साल पहले जो तेजी दिखाई दी थी, अब वह भी गायब है। सिर्फ सोना है जो चमक बिखेर रहा है। डाकघर की बचत ने निवेशकों का थोड़ा बहुत विश्वास हासिल किया है।
दून में निवेश रीयल एस्टेट के बलबूते ही पला और बड़ा हुआ। वर्ष 2000 से पहले तक दून सेवानिवृत्त और पेंशनर्स के शहर के रूप में जाना जाता था। पर राज्य गठन के बाद हालात बदले। दून में इस समय हर वर्ष करीब साढ़े तीन लाख लोग रोजी रोटी और अन्य कारणों से आवाजाही करते हैं।
तीन साल पहले तक रीयल इस्टेट की विकास दर तीस प्रतिशत तक रही। इसमें रिटर्न कई बार तो सौ प्रतिशत तक रहा। इसी रीयल इस्टेट के बलबूते ही स्टाक मार्केट को भी बढ़त मिली। निवेशकों को सही रिटर्न मिला तो स्टॉक में लोगों का विश्वास भी बढ़ा। पर पिछले तीन सालों में यह तस्वीर उलट हो गई है। स्टॉक से निवेशकों का ध्यान हटा है।
ब्रोकरों के मुताबिक सोने और चांदी में निवेश करने वालों की संख्या जरूर बढ़ी है। सोने में निवेशकों को पिछले दो साल में करीब 70 प्रतिशत और पिछले साल में करीब 30 प्रतिशत तक का रिटर्न मिला। दून का निवेशक अब कुछ हद तक स्मार्ट भी हुआ है। ई गोल्ड से लेकर फिजीकल गोल्ड, गोल्ड आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश करने में उसने विश्वास जाहिर किया है।
कमोडिटी, फ्यूचर आप्संस में निवेश करने में हिचकचाहट बरकरार है। छोटे शहरों में निवेश के तरीकों में आए बदलाव पर रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट के प्रेसिडेंट और सीईओ संदीप सिक्का का कहना है कि पिछले दस साल में सेबी द्वारा नियमों में बदलाव करने से निवेशकों के निवेश के फैसले लेने की आदतों में बदलाव हो रहा है। अब ग्रोथ छोटे शहरों और कस्बों से आएगी, जिसके लिए उद्योग जगत कोे अपनी रणनीति बदलनी होगी।
इन सबके बावजूद दून में सुरक्षित निवेश की आदत बरकरार है। लिहाजा बैकिंग इंस्ट्रूमेंट में निवेश में अब तेजी है। सितंबर 2011 में दून में टर्म डिपाजिट के 1.18 लाख खाते थे। इनमें कुल जमापूंजी करीब 4,294.50 करोड़ थी। सितंबर 2012 में टर्म डिपाजिट के खाते बढ़कर 2.5 लाख हो गए। इनमें अब 8209.71 करोड़ रुपये का डिपाजिट है।
खुद बैंकर्स मान रहे हैं कि एफडी, आरडी के सुरक्षित निवेश में दून का निवेशक भविष्य तलाश रहा है। दूनवासियों का डाकघरों में विश्वास फिर से लौटा है। डाकघरों में 2007-08 में शुद्ध जमा 21,988 लाख था जो अगले साल ही घट कर 5,058 लाख रह गया। लेकिन 2010-11 में यह जमाराशि बढ़कर 30,309.13 लाख हो गई। वर्ष 2009-10 के बाद से निवेशकों की डाकघरों में वापसी होनी शुरू हो गई है। इसमें भी दीर्घकालीन प्रतिभूतियों पर जोर है। डाकघरों से करीब सात प्रतिशत रिटर्न की उम्मीद निवेशक कर रहे हैं।
बीमा को सुरक्षा से हटकर निवेश के रूप में देखने की आदत से दून का निवेशक भी हटा नहीं है। परंपरागत प्लान में बीमा बचत की ओर भी निवेशकों का रुख है। मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीईओ स्वराज कृष्णन का कहना है कि कंपनी छोटे शहरों में जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में तेजी से कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही है, क्योंकि सबसे अधिक ग्रोथ और रिटर्न छोटे शहरों से ही आएगा।