कई लोग नौकरी छोड़ने और रिटायर होने के बाद अपने ईपीएफ खाते से रकम निकासी नहीं करते हैं। इस दौरान उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से हर साल ब्याज दर का फायदा भी मिलता है। लेकिन ज्यादातर लोग इस बात से वाकिफ नहीं हैं कि नौकरी छोड़ने और रिटायर होने के बाद ईपीएफ खाते पर मिलने वाले ब्याज पर कर का भुगतान करना पड़ता है। ईपीएफओ के अनुसार, कर से छूट सिर्फ कर्मचारियों को ही मिलती है। कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है या रिटायर हो जाता है तो ब्याज पर कर भुगतान करना पड़ता है।
...तो निष्क्रिय हो जाता है खाता
ईपीएफओ ने 2011 में ऐसे खातों पर ब्याज देना बंद कर दिया है, जो 3 साल से अधिक समय से संचालन में नहीं है और उसे निष्क्रिय खातों की श्रेणी में डाल दिया जाता था। लेकिन अब खाता तब निष्क्रिय होता है, जब कर्मचारी जमा रकम की निकासी का आवेदन 55 साल की उम्र पर रिटायरमेंट के 36 महीने के भीतर नहीं देता है।
वेलफेयर फंड में चली जाती रकम
मौजूदा नियम के मुताबिक, ईपीएफ खाते के सात साल निष्क्रिय होने पर जिस रकम पर क्लेम नहीं किया जाता है। वह सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड में चली जाती है।
EPFO पेंशन भोगियों को देगा बढ़ी हुई पेंशन
मालूम हो कि कोरोना संकट के बीच कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से पेंशन भोगियों के लिए अच्छी खबर है। अब इन्हें बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी। ईपीएफओ ने हाल ही में बताया था कि परिवर्तित पेंशन को बहाल करने के लिए कुल 973 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसमें पेंशन के लिए 868 और एरियर के लिए 105 करोड़ रुपये हैं।
ईपीएफओ पर फैसले लेने वाली शीर्ष संस्था केंद्रीय न्यासी बोर्ड की सिफारिश के आधार पर केंद्र सरकार ने श्रमिकों की लंबे समय से जारी मांगों में से एक को स्वीकार कर लिया। इसके तहत श्रमिकों को 15 साल के बाद पेंशन के परिवर्तित मूल्य को बहाल करने की अनुमति मिल गई। अब तक परिवर्तित पेंशन को बहाल करने का कोई प्रावधान नहीं था और पेंशनभोगियों को आजीवन कम पेंशन मिल रही थी।