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बजट के हिसाब से शुरू कर दें अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग

Sun, 20 Jul 2014 09:10 PM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
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आमतौर पर लोग नया वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही नए वर्ष के लिए अपनी फाइनेंशियल व टैक्स प्लानिंग को आकार देना शुरू कर देते हैं। हालांकि इस बार फरवरी में अंतरिम बजट पेश किए जाने के चलते यह मामला अटका हुआ था। लोग नई सरकार के बजट और उसमें होने वाली टैक्स संबंधी घोषणाओं का इंतजार कर रहे थे। उनको इस इंतजार का मीठा फल भी मिला है।
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मोदी सरकार के पहले बजट में आयकर छूट की सीमा को दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये करते हुए मध्य वर्गीय और वेतन भोगी कर्मचारियों को 50 हजार रुपये की अच्छी खासी राहत दी गई है। हालांकि 2014 के बजट में मिली इस बड़ी खुशी के साथ ही कुछ छोटे-मोटे गम भी निवेशकों के हिस्से में आए हैं। ऐसे में बजट के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए।

राहतों के साथ विकल्पों का भी दायरा बढ़ा

बजट में धारा 80 सी के तहत आयकर छूट की सीमा को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये सालाना करने और पीपीएफ में कर छूट योग्य निवेश की सीमा  एक लाख बढ़ाकर सालाना डेढ़ लाख रुपये किए जाने की घोषणा सबसे प्रमुख रही। इसके अलावा भी निवेशकों को बजट में कुछ राहतें मिली हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी अपेक्षाकृत कम है। इनमें से एक घोषणा है नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) के साथ अब निवेशकों को बीमा कवर दिए जाने की।
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इसके अलावा किसान विकास पत्र (केवीपी) को एक बार फिर से शुरू किया जाना भी निवेशकों को एक पुराने विकल्प को एक बार फिर से उपलब्ध कराने वाला कदम है। इसके साथ ही बजट में बेटी की शादी, पढ़ाई के लिए स्पेशल सेविंग स्कीम बनाने की घोषणा भी सरकार की ओर से की गई है।

ईपीएफ के ढांचे में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब 15,000 रुपये तक का वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफ कटौती जरूरी हो गई है। निवेशकों की सुविधा के लिए एक ही डीमैट में एफडी, म्यूचुअल फंड, शेयर और इंश्योरेंस की जानकारी उपलब्ध कराने और वित्तीय लेन-देन के लिए एक ही केवाईसी (कॉमन केवाईसी) शुरू किए जाने से भी निवेशकों को सहूलियत होगी। बजट में होम लोन के ब्याज की अदायगी पर छूट की सीमा को डेढ़ लाख रुपये से बढ़कर दो लाख रुपये किए जाने से सालाना 16,995 रुपये की अधिकतम टैक्स बचत बचत की जा सकेगी।

नॉन इक्विटी म्यूचुअल फंड अब 20 फीसदी टैक्स

बजट में नॉन-इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी हुआ है। लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के लिए फंड में 3 साल तक बने रहना जरूरी है। हालांकि इक्विटी म्यूचुअल फंड की डिविडेंड आय पर टैक्स और लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है, जबकि इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 15 फीसदी का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।

डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स की देनदारी बढ़ेगी
बजट में की गई एक घोषणा कॉरपोरेट और म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए खासी परेशानी का सबब बन गई है। डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स की गणना अब नेट के बजाय ग्रॉस डिविडेंड पर किए जाने के प्रावधान से से म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स की देनदारी करीब 15 फीसदी बढ़ जाएगी।
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