पिछले कुछ सालों से रिटायरमेंट प्लान वाले वैसे विज्ञापनों की बाढ़ आ गई है, जिनमें कहीं बुजुर्ग अपने हमउम्र के साथ क्रिकेट खेलते दिखाए जाते हैं तो कहीं अपने जीवन साथी के साथ छुट्टियां बिताने किसी हॉलीडे डेस्टिनेशन पर होते हैं। बिल्कुल चिंतामुक्त। और उन्हें चिंतामुक्त बनाती है समय पर की गई उनकी रिटायरमेंट प्लानिंग।
कंपनियां इस तरह के विज्ञापन अपने रिटायरमेंट प्लान के विकल्प के हिसाब से देती हैं। इसमें यह देखना जरूरी होगा कि कौन सा उत्पाद किसके लिए मुफीद होगा। व्यक्ति की उम्र, मासिक आय, जीवनशैली, निवेश की क्षमता आदि के आधार पर यह तय होता है कि किसे कहां और कितना निवेश करना चाहिए। रिटायरमेंट की प्लानिंग सबके लिए एक जैसी नहीं हो सकती।
नौकरी अथवा कारोबार की शुरुआत करते ही रिटायरमेंट की प्लानिंग के हिसाब से निवेश करने वाले का विकल्प बिल्कुल अलग होगा, जबकि रिटायरमेंट के लिए निवेश देर से शुरू करने वालों के लिए अलग। जल्द निवेश शुरू करने वालों को कम मासिक रकम निकालनी होगी और उन्हें पावर ऑफ कम्पाउंडिंग का लाभ मिलेगा। पावर ऑफ कम्पाउंडिंग यानी ब्याज के ऊपर ब्याज। पावर ऑफ कम्पाउंडिंग का असली लाभ लंबे निवेश में ही मिलता है।
बाजार में आज निवेश के विकल्पों की भरमार है। पीपीएफ से लेकर बीमा प्लान, सावधि जमा योजनाएं, इक्विटी, कई तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश के विकल्प मौजूद हैं। एक आम व्यक्ति के लिए अपने लिए सही विकल्प को समझ पाना भी बड़ा ही मुश्किल काम है, ऐसे में सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार की मदद लेना मुफीद रहता है।
रिटायरमेंट की प्लानिंग में सबसे अहम बात यह जानना है कि रिटायरमेंट के समय आपको कितनी मासिक रकम की जरूरत होगी, स्वास्थ्य के लिए बीमा का क्या होगा, जीवनशैली कैसी चाहिए आदि। रिटायरमेंट के समय रुपये की कीमत उतनी नहीं रह जाएगी, जितनी की अभी है। यानी इसमें महंगाई का एलिमेंट भी शामिल करना होगा।
मसलन, अगर आपका खर्च आज 25 हजार रुपये मासिक है और आप 20 साल बाद रिटायर होने वाले हैं तो उस समय आपको 25 हजार के ऊपर 20 साल तक बढ़ने वाली मुद्रास्फीति को भी जोड़ना होगा। रिटायरमेंट प्लानिंग में यह सबसे जरूरी है कि आपकी आमदनी नियमित रहे। हर माह नियत राशि आने में कोई दिक्कत न हो, साथ ही स्वास्थ्य पर आने वाले आसन्न खर्चे के लिए पर्याप्त बीमा हो।