मांग को बढ़ाने के लिए देश के प्रमुख बैंक अब होम लोन ग्राहकों को खास ऑफर देकर लुभाने की तैयारी में हैं।
इसके तहत जहां देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक नई स्कीम लाने की तैयारी में है। वहीं, दूसरे बैंक होम लोन पर ओवर ड्रॉफ्ट की सुविधा दे रहे हैं।
इसके अलावा ग्राहकों पर ब्याज का बोझ आसान करने के लिए उनके होम लोन को दूसरे खाते के साथ जोड़ने की भी बैंक सुविधा दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक प्रॉपर्टी की कीमत के आधार पर कर्ज लेने वालों के लिए प्रॉपर्टी की खरीद में ग्राहक की ओर से लगाए गए पैसे और उनकी लोन की राशि को देखते हुए ब्याज दर तय करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह एक नया होम लोन उत्पाद जल्द ला सकता है।
अभी बैंक प्रॉपर्टी की कीमत के मुकाबले 85-90 फीसदी तक राशि कर्ज के रूप में देते हैं। इसमें घर की कीमत के आधार पर ब्याज तय होती है।
नए उत्पाद में प्रॉपर्टी की कीमत के दायरे के साथ-साथ उसकी खरीद के लिए ग्राहक द्वारा लिए जा रहे लोन की रकम पर भी ब्याज तय हो सकेगी। यानी यदि कोई ग्राहक कीमत की तुलना में 50-60 फीसदी ही कर्ज लेगा, तो उसे बैंक ब्याज में छूट दे सकेगा।
इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर किसी प्रॉपर्टी की कीमत 20 लाख रुपये है, उस पर केवल 10-12 लाख रुपये कर्ज लिया जाता है, तो ग्राहक को ज्यादा कर्ज लेने वाले ग्राहक की तुलना में कम ब्याज चुकाना होगा।
इसी तरह ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने अपने होम लोन ग्राहकों के लिए स्त्री शक्ति स्कीम शुरू की है। इसमें वह ग्राहक की पत्नी या फिर महिला होम लोन ग्राहक को तीन लाख रुपये तक पर्सनल लोन दे रहा है। जिस पर वह सामान्य पर्सनल लोन की तुलना में कम ब्याज ले रहा है। बैंक 12.75 फीसदी पर यह कर्ज दे रहा है।
आईडीबीआई बैंक ने भी इसी तरह होम लोन पर ब्याज बचत स्कीम शुरू की है। इसमें ग्राहक के होम लोन खाते को किसी दूसरे खाते के साथ लिंक कर दिया जाता है।
खाते में अतिरिक्त राशि के आधार पर ग्राहक को ब्याज की राशि में छूट मिलती है। साथ ही ग्राहक उस खाते में जरूरत पड़ने पर पूंजी निकाल और जमा दोनों कर सकता है।
बैंकर्स के अनुसार हाउसिंग सेक्टर में इस समय केवल ऐसे ग्राहक आ रहे हैं, जो घर रहने के उद्देश्य से ले रहे है। निवेश करने के उद्देश्य से आने वाले ग्राहकों की संख्या कम है, जिसका असर मांग पर पड़ा है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार जून 2013 तक हाउसिंग सेक्टर में जून 2012 की तुलना में मांग में केवल 2.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जून 2011 से 2012 की अवधि में मांग 17 फीसदी के करीब रही थी।