आगामी एक जुलाई से देश का सबसे बड़ा बैंक--भारतीय स्टेट बैंक--(एसबीआई) अपने होम लोन को एमसीएलआर से हटाकर के रेपो रेट लिंक रेट (आरएलएलआर) से लिंक कर देगा। इससे ग्राहकों पर काफी असर पड़ने की संभावना है। नए रेट से लिंक होने के बाद ऐसी संभावना है कि बैंक से केवल वो ही लोग लोन ले सकेंगे जिनकी सालाना आय छह लाख रुपये से ज्यादा है। हालांकि इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद ग्राहकों को इसका फायदा मिलेगा या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।
अभी चल रहा है एमसीएलआर
फिलहाल देश के सभी बैंकों में होम लोन पर लगने वाले ब्याज की दर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लैंडिंग रेट (एमसीएलआर) से तय होती है। इसको बैंक तय करते हैं और आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कमी या फिर बढ़ोतरी से इसका खास असर देखने को नहीं मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आरबीआई 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करता है, तो भी बैंक पांच से 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हैं।
रेपो रेट में बदलाव का दिखेगा असर
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि एसबीआई द्वारा शुरू की जा रही नई व्यवस्था से रेपो रेट में जो भी बदलाव होगा आरएलएलआर पर दिखेगा। लोगों को मूल राशि का हर साल तीन फीसदी रकम, ब्याज के अलावा देना होगा। एसबीआई के एमडी, रिटेल एंड डिजिटल बैंकिंग पी के गुप्ता ने कहा कि ईएमआई में पूरे साल उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
सालाना आय की बड़ी होगी भूमिका
लोगों की सालाना आय की नई व्यवस्था में बड़ी भूमिका होगी। ऐसा माना जा रहा है कि एसबीआई केवल छह लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आय वाले लोगों को ही इस स्कीम में लेकर के आएगा।
8.4 फीसदी होगी ब्याज दर
75 लाख रुपये तक का होम लेने वालों को 8.4 फीसदी के हिसाब से ब्याज देना होगा। यह ब्याज तब लगेगा जब बैंक प्रॉपर्टी की कीमत का 80 फीसदी तक लोन देगा। अगर बैंक 80 फीसदी से ज्यादा का लोन देता है तो फिर उस पर 20 बीपीएस अतिरिक्त देना होगा। वहीं लोगों को अधिकतम 33 साल के लिए लोन मिलेगा। निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर दो साल का एक्सटेंशन भी मिल सकेगा।