आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या देखें तो बीते चार वर्षों के दौरान इनकी संख्या में 80 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफ़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि आकलन वर्ष 2013-14 में रिटर्न दाखिल करने वालों की तादाद 3.79 करोड़ थी जबकि 2017-18 में यह संख्या 6.85 करोड़ हो चुकी है। यदि वैयक्तिक करदाताओं की श्रेणी में देखें तो इसमें करीब 65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आकलन वर्ष 2013-14 में ऐसे करदाताओं की संख्या 3.31 करोड़ थी जो कि आकलन वर्ष 2017-18 में बढ़ कर 5.44 करोड़ हो गई है।
इसलिए दर्ज हुई बढ़ोतरी
सीबीडीटी अध्यक्ष का कहना है कि कराधान और कर संग्रह से जुड़ी संस्थाओं ने बीते सालों में जो कानूनी, सूचनात्मक प्रचार-प्रसार अभियान से संबंधित और दबावकारी कदम उठाए हैं, उनके नतीजे में यह बढ़त दर्ज हो रही है।
आय घोषित में भी बढ़ोतरी
सीबीडीटी के अनुसार आईटी रिटर्न में घोषित आय में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उदाहरण के लिए आकलन वर्ष 2014-15 में कुल 26.92 लाख करोड़ रुपये की कुल आय घोषित हुई थी। यह वर्ष 2017-18 में 44.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई जो कि 67 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
इस दौरान वेतनभोगी करदाताओं की संख्या में भी 37 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2014-15 में ऐसे करदाताओं की संख्या 1.70 करोड़ थी जो कि वर्ष 2017-18 में बढ़ कर 2.33 करोड़ हो गई। इसी अवधि में गैर वेतन भोगी करदाताओं की संख्या में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।