देशभर की करीब 8 लाख आटोमेटिक टेलर मशीन में अगले चार महीने में बदलाव किया जाएगा।
सितंबर के अंत तक हर एक एटीएम को रुपे गेटवे कार्ड के लिए नए सॉफ्टवेयर से लैस किया जाएगा, जिसके बाद किसी भी एटीएम में मास्टर कार्ड, वीजा कार्ड, रुपे कार्ड का उपयोग किया जा सकेगा।
गुड़गांव में ग्रामीण बैंक के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के सीईओ एपी होटा ने बताया कि देशभर में इस समय करीब 8 लाख एटीएम हैं, जिसमें करीब 30 करोड़ एटीएम कार्ड धारक हैं।
इन सभी मशीनों से नकदी निकालने के लिए मास्टर कार्ड व वीजा कार्ड का उपयोग होता है। इन दोनों में विदेशी तकनीकों का उपयोग होता है। जिसके लिए विदेशी कंपनियां बैंकों से अपने लाइसेंस फीस के अलावा रकम के लेन-देन पर भारी शुल्क लेती हैं।
भारतीय बैंकों ने मिलकर नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की स्थापना की है जिसने पेमेंट गेटवे का स्वदेशी विकल्प रुपे तैयार किया है। इस गेटवे के इस्तेमाल पर बैंकों को बहुत ही कम शुल्क देना होता है।
सरकार चाहती है कि नो फ्रिल खातों के लिए रुपे कार्ड जारी किए जाए और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। इस कार्ड के जरिए लोग एटीएम से नकदी निकाल सकेंगे। रुपे का इस्तेमाल होने से भारतीय बैंकों को भारी आर्थिक फायदा होगा।
रुपे कार्ड को हर एक एटीएम में चलाने के लिए सभी 8 लाख एटीएम में बदलाव किया जाएगा। इनमें सॉफ्टवेयर के अलावा कुछ अन्य उपकरण भी बदले जाएंगे। अब तक देशभर में करीब 1 लाख 70 हजार मशीनों में यह बदलाव किया जा चुका है।
जुलाई के अंत तक 5 लाख एटीम रुपे कार्ड को स्वीकार कर सकेंगे। 30 सितंबर 2013 तक देशभर के सभी 8 लाख एटीएम को रुपे कार्ड के अनुसार बदल दिया जाएगा। जिसके बाद किसी भी एटीएम में मास्टर कार्ड, वीजा कार्ड, रुपे कार्ड का उपयोग किया जा सकेगा।