खुदरा महंगाई दर के मई में चार महीने के ऊपरी स्तर 4.87 फीसदी पर पहुंचने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगस्त में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में फिर एक बार मुख्य ब्याज दर में वृद्धि करने को बाध्य हो सकता है। यह बात विभिन्न विश्लेषकों ने कही।
एक दिन पहले ही उद्योग संघ भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा था कि मुख्य ब्याज दर बढ़ने से कारोबार करने की लागत बढ़ेगी और देश के कारोबारी निवेश की गति घटाने को बाध्य होंगे, जो कि विकास को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।
फ्रांस की ब्रोकरेज कंपनी बीएनपी पारिबा की एक रिपोर्ट में विश्लेषकों ने कहा है कि आगामी महीनों में विभिन्न कारणों से मुख्य क्षेत्रों की महंगाई और खुदरा महंगाई बढ़ने का अंदेशा है और हमारा मानना है कि आरबीआई एक बार और मुख्य ब्याज दर में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी कर सकता है। यह 31 जुलाई से एक अगस्त तक चलने वाली समीक्षा बैठक में भी हो सकता है।
यूबीएस सिक्योरिटीज ने भी कहा कि अगस्त में दर में वृद्धि की जा सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमत मौजूदा स्तर पर बनी रहती है और मुख्य क्षेत्रों की महंगाई ऊपर की ओर बनी रहती है, तो अगली दर वृद्धि अगस्त में ही हो सकती है।